उधर, शंकर लालवानी का कहना है कि सिंधी उनकी मातृभाषा है और संसद में इस जुबान में उनके शपथ लेने को लेकर अनर्गल विवाद खड़ा नहीं किया जाना चाहिये। लोकसभा सदस्यों का अलग-अलग भाषाओं में शपथ लेना दिखाता है कि देश में अनेकता में एकता की भावना समृद्ध है।
अपने राजनीतिक जीवन में पहली बार चुनकर लोकसभा पहुंचे 57 वर्षीय भाजपा नेता ने कहा, 'मैंने संसद में केवल 40 सेकंड की शपथ सिंधी में ली। लेकिन अगले पांच साल मुझे लोकसभा सांसद के रूप में सदन में हिंदी ही बोलनी है। वैसे भी मैं और मेरा परिवार आमतौर पर हिंदी में ही बात करते हैं।'
लालवानी ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा, 'कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी केरल के वायनाड लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुने गए हैं। कांग्रेस को बताना चाहिये कि उन्होंने मलयालम के बजाय अंग्रेजी में शपथ क्यों ली?'
इस बीच, लालवानी के सिंधी भाषा में शपथ लेने पर सिंधी समुदाय में खुशी का माहौल है। समुदाय के संगठन अखिल भारतीय सिंधी महासभा के संरक्षक किशोर कोडवानी ने कहा, 'संसद में लालवानी के सिंधी भाषा में शपथ लेने से हमारी मातृभाषा का मान बढ़ा है।'