करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी के मामले में सीबीआई ने इंदौर के सात कारोबारियों पर प्रकरण दर्ज किया है। ये सभी दाल व अनाज कारोबारी हैं। प्रकऱण में बैंक के अधिकारियों और दलालों की भूमिका भी संदिग्ध है, जिसकी जांच की जा रही है। व्यापारियों ने बैंक से करोड़ों रुपये का लोन लेने के बाद इसे चुकाया नहीं था जिस पर सीबीआई से शिकायत हुई और मामला उजागर हुआ।
सीबीआई मुख्यालय भोपाल के अनुसार इंदौर के अनाज व्यापारियों ने वर्ष 2017 से 2019 के बीच यूनियन बैंक से 27 करोड़ रुपये का लोन लिया था। लोन लेने के लिए अनाज व्यापारियों ने कई फर्म बनाई थी। ये फर्म अनाज और दाल के व्यापार से जुड़ी थी। व्यापारियों ने लोन तो ले लिया लेकिन इसे चुकाया नहीं। बैंक ने कई बार फर्म को पत्र लिखे लेकिन कोई जवाब नहीं मिला और संचालक भी गायब मिले। जब मामले की शिकायत सीबीआई से की गई तो पूरा मामला उजागर हुआ। इसके बाद सीबीआई ने डिप्टी जनरल मैनेजर पार्थ सारथी की शिकायत पर पहला केस हजारीलाल एंड कंपनी के कर्ताधर्ता संजय खंडेलवाल, चंदाबाई खंडेलवाल, हरिनारायण खंडेलवाल, माणकचंद खंडेलवाल और अन्य के खिलाफ दर्ज किया। वहीं दूसरा केस अपूर्व एंड कंपनी के कर्ताधर्ता गिरधर खंडेलवाल, प्रणव खंडेलवाल, हरिनारायण खंडेलवाल, माणकचंद खंडेलवाल के खिलाफ दर्ज किया है। तीसरा केस हरी पल्सेस के कर्ताधर्ता चंदाबाई खंडेलवाल, राजेंद्र खंडेलवाल, कलावती खंडेलवाल, हरिनारायण खंडेलवाल, मूलचंद खंडेलवाल के खिलाफ दर्ज किया। बताया गया कि करोड़ों रुपये का यह घोटाला यूनियन बैंक की अनूप नगर और विष्णुपुरी ब्रांच में हुआ है। जांच में यह बात सामने आई है कि बैंक के अधिकारियों की मदद से यह सब हुआ है। दलालों की भूमिका भी संदिग्ध है। इसकी भी जांच की जा रही है।