तीन महीने पहले इंदौर का टाटपट्टी बाखल इलाका सुर्खियों में छा गया। दरअसल, यहां एक कोविड-19 मरीज को देखने गई स्वास्थ्य कर्मियों की टीम पर लोगों ने हमला कर दिया। कोरोना काल में डॉक्टरों पर हुए हमले का यह पहला मामला था। देश के अन्य हिस्सों में हुए हमलों के बाद भी टाटपट्टी बाखल को अपमान की नजर से देखा गया।
वहीं, उस घटना के बाद से यहां काफी कुछ बदल गया है। पिछले दो महीनों से यहां एक भी कोरोना वायरस का मामला सामने नहीं आया है। यह इलाका एक समय कोरोना वायरस हॉटस्पॉट था, लेकिन अब कोविड-19 रिकवरी में बेंचमार्क के रूप में उभरा है।
दरअसल, डॉक्टरों पर हुए हमले के बाद यहां के बुजुर्गों ने इलाके के लोगों को समझाने का जिम्मा संभाला। बुजुर्गों ने यहां के हर घर पर जाकर निवासियों से कहा कि उन्हें अफवाहों पर ध्यान देने की जरूरत नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य टीम के साथ सहयोग करने की जरूरत है।
जब स्क्रीनिंग टीम यहां पहुंचती थी, तो उसे इलाके के प्रभावशाली लोगों द्वारा घरों तक पहुंचाया जाता था। साथ ही इस बात का भी ख्याल रखा जाता था कि टीम के लिए बंद हर घर के दरवाजे खुलें। वर्तमान समय में, स्क्रीनिंग टीम के पहुंचने पर उनका स्वागत फूल बरसाकर और ढोल बजाते हुए किया जाता है।
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अप्रैल महीने में जिस समय स्वास्थ्य कर्मियों पर हमला हुआ था। उस दौरान इंदौर मध्यप्रदेश में कोविड-19 हॉटस्पॉट बनकर उभरा था। वहीं, टाटपट्टी बाखल उच्च जोखिम वाला क्षेत्र था। इलाके में चारों ओर अफवाहें घूम रही थीं और जब सुबह के समय स्वास्थ्य कर्मियों की टीम यहां पहुंची तो उन पर हमला हो गया। छतों के ऊपर से टीम पर पत्थर फेंके जा रहे थे और डंडा लिए लोग दो महिला डॉक्टरों की तरफ बढ़ रहे थे। यह सब वीडियो में रिकॉर्ड हो गया।
200 घरों वाला यह इलाका अचानक से अखबारों की सुर्खियों और टीवी चैनलों में आ गया। देशभर में इस घटना की निंदा की गई। वहीं, सरकार ने इसके बाद सख्त कदम उठाते हुए, संदिग्धों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत मामला दर्ज किया।
तब, यहां के लोगों ने हालात को फिर से सामान्य करने का जिम्मा उठाया। यहां के निवासियों ने इलाके में जागरूकता फैलाना शुरू किया। वहीं, जिन स्वास्थ्य कर्मचारियों पर हमला किया गया था, उन्होंने अपने काम को पूरा करने के लिए उसी स्थान पर लौटकर एक आश्चर्यजनक उदाहरण दिया।
जब डॉक्टरों की टीम यहां पहुंची तो वह यह देखकर हैरान हो गई कि जिन लोगों ने पहले उनपर हमला किया था। वही लोग अब उनपर फूल बरसा रहे हैं और माफी मांग रहे हैं। इलाके के बुजुर्ग उन्हें हर एक घर तक ले गए।