मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने गांधी नगर क्षेत्र में अवैध रूप से रास्ता रोककर पंडाल लगाने के मामले में सख्त रुख अपनाया है। मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस उपायुक्त नरेंद्र रावत ने गुरुवार को अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर जवाब पेश किया। अधिकारी ने अदालत को बताया कि पंडाल के स्थान से 10 फीट का रास्ता आम जनता के लिए खुलवा दिया गया है। पुलिस ने रास्ता बाधित करने वाले आयोजक के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज की है। उच्च न्यायालय ने इस पूरे मामले पर राज्य सरकार से दो सप्ताह में विस्तृत जवाब मांगा है।
पुलिस की कार्रवाई और अदालत के सवाल
सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने समय रहते कार्रवाई न होने पर गहरी नाराजगी जताई। अदालत ने सवाल किया कि रास्ता बंद होने पर अधिकारियों ने तुरंत कदम क्यों नहीं उठाए। इस पर पुलिस उपायुक्त ने अदालत को सूचित किया कि कार्रवाई से पहले आयोजक को नोटिस जारी किया गया था। पुलिस ने इसके बाद स्थल पर पहुंचकर 10 फीट चौड़ा मार्ग उपलब्ध कराया और दोषी आयोजक पर कानूनी कार्रवाई शुरू की। अदालत ने निर्देश दिया कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो, इसके लिए पुख्ता योजना बनाई जाए।
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बिना अनुमति बने पंडाल पर जवाब तलब
इससे पहले हुई सुनवाई में शासन की ओर से अदालत को बताया गया था कि पंडाल निर्माण के लिए कोई वैध अनुमति नहीं दी गई थी। इस पर उच्च न्यायालय ने गंभीर सवाल उठाए कि जब अनुमति ही नहीं थी, तो इतना बड़ा पंडाल कैसे खड़ा हो गया। प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारियों ने समय रहते इस अवैध निर्माण को क्यों नहीं रोका। इसी लापरवाही और देरी पर जवाब देने के लिए अदालत ने पुलिस उपायुक्त को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया था।
हजारों परिवारों की परेशानी का मुद्दा
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता चर्चित शास्त्री ने अदालत के समक्ष स्थानीय निवासियों की समस्याएं रखीं। उन्होंने बताया कि गांधी नगर क्षेत्र में पंडाल गाड़ने से हजारों परिवारों का आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया। मुख्य रास्ता बंद होने से स्थानीय व्यापार पर भी बहुत बुरा प्रभाव पड़ा। याचिका में कहा गया कि लगभग 50 फीट के पंडाल वाले हिस्से में से कम से कम आठ फीट रास्ता खुला रखने के लिए प्रशासन से गुहार लगाई गई थी। प्रशासनिक स्तर पर त्वरित सुनवाई न होने के पीछे राजनीतिक दबाव का आरोप भी लगाया गया। अदालत ने अब सरकार से दो सप्ताह में सुधारात्मक कदम उठाने की रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।