उधर, अभियोजन पक्ष के एक अधिकारी ने बताया कि 25 वर्षीय हिंदू युवती ने इस संबंध में एक मामला दर्ज कराया है। अभियोजन पक्ष ने बताया कि मामले के अनुसार कि उसके माता-पिता मंगलवार सुबह नानी के घर ले जाने का कथित झांसा दे उसे ईसाई समुदाय के सत्प्रकाशन संचार केंद्र में चल रही प्रार्थना सभा में ले गए था।
इंदौर शहर के पास स्थित गुजरखेड़ा गांव से ताल्लुक रखने वाली युवती की शिकायत के हवाले से प्राथमिकी में आरोप लगाया गया कि इस केंद्र में कुछ लड़कियों ने उसके हाथ-पैर खींचकर उसके साथ मारपीट की और वहां उसे एक हॉल में जबरन बैठाकर रखा गया। बता दें, इस मामले का एक वीडियो भी सामने आ चुका है।
युवती के हवाले से दर्ज कराई गई प्राथमिकी में यह भी लिखा गया कि वह हिंदू धर्म में जन्मी है, इसी धर्म का पालन करती है और ईसाई धर्म अपनाने की उसकी कोई इच्छा नहीं है। लेकिन उसके माता-पिता और सत्प्रकाशन संचार केंद्र में मौजूद ईसाई आयोजकों ने उसके धर्मांतरण की कथित तौर पर जबरिया कोशिश की।
उधर, सत्प्रकाशन संचार केंद्र के निदेशक फादर बाबू जोसफ ने इन आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि ईसाई समुदाय के एक समूह को मंगलवार को बैठक व प्रार्थना सभा के लिए केंद्र का हॉल दिया गया था। लेकिन कुछ असामाजिक तत्व धर्मांतरण गतिविधि चलने का आरोप लगाते हुए हॉल में बलपूर्वक घुस गए थे।
इस संबंध में एक वीडियो भी सामने आ चुका है जिसमें घटना के दौरान बजरंग दल के कार्यकर्ता केंद्र के परिसर में नारेबाजी करते नजर आए थे। दल की स्थानीय इकाई के प्रमुख तन्नू शर्मा का आरोप है कि यहां इंदौर के साथ खंडवा, झाबुआ, बुरहानपुर और अन्य जिलों के करीब 300 लोगों को धर्मान्तरण के लिए बुलाया गया था।