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इंदौर: एयर इंडिया और विस्तारा के पास विमान से यात्रियों को उतारने के लिए जरूरी मशीनें नहीं, एयरपोर्ट प्रबंधन ने जताई नाराजगी

Sat, 27 Nov 2021 01:14 PM IST
चंद्रप्रकाश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर

सार

इंदौर एयरपोर्ट प्रबंधन ने एयर इंडिया और विस्तारा कंपनी पर नाराजगी जताते हुए टो बार मशीनों की व्यवस्था करने के निर्देश दिए है। टो बार न होने से मुसाफिरों को विमानों में चढ़ने-उतरने में दिक्कत होती है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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इंदौर एयरपोर्ट से फ्लाइट्स की संख्या तो बढ़ गई, लेकिन बड़ी कंपनियों को जरूरी मशीनों की कमी से जूझना पड़ रहा है। बुधवार को एयर इंडिया की फ्लाइट रात करीब नौ बजे दुबई से इंदौर आई थी। एयर इंडिया के पास यात्रियों को उतरने में मदद करने वाली टो-बार मशीन नहीं थी। यात्रियों को सीढ़ी के सहारे उतरना पड़ा। टर्मिनल तक पहुंचने के लिए बस की मदद लेना पड़ी। इस घटना पर एयरपोर्ट मैनेजमेंट ने एयरपोर्ट सिक्योरिटी कमेटी मीटिंग में अपनी नाराजगी जाहिर की। साथ ही एयर इंडिया और विस्तारा को टो बार की व्यवस्था के निर्देश दिए हैं। 
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क्या होती हैं टो बार मशीनें 
यह मशीनें विमानों को खींचकर एयरोब्रिज तक ले जाती है। एयर इंडिया और विस्तारा कंपनी के पास ये मशीनें नहीं है। इनके अभाव में यात्रियों को विमान तक आने-जाने के लिए बसों का सहारा लेना पड़ रहा है। बुधवार की घटना के बाद एयरपोर्ट सिक्योरिटी कमेटी की बैठक बुलाई गई थी। बताया जा रहा है कि इस संबंध में मुख्यालय के निर्देश हैं कि सभी विमानों को एयरोब्रिज पर लगाने और वापस ले जाने के लिए एयरलाइंस टो-बार का इस्तेमाल करें। अक्सर कंपनियां एयरोब्रिज पर विमानों को लगाने के लिए तो इस मशीन का इस्तेमाल करती हैं, लेकिन धकेलने के बजाय घुमाकर वापस ले जाती हैं। कंपनियों को कहा गया है कि वे टो बार की मदद से ही विमान को पीछे ले जाए।

खराब हैं मशीनें 
विस्तारा और एयर इंडिया के अधिकारियों ने बैठक में बताया कि उनके उपकरण खराब हैं। इस वजह से परेशानी हो रही है। इसे लेकर उन्हें तुरंत मशीनें ठीक करवाने या दूसरी मशीनें बुलवाने के निर्देश दिए। एयरपोर्ट मैनेजमेंट की माने तो टो बार नहीं होने से विमान एयरोब्रिज पर नहीं लग पा रहे हैं। उन्हें एप्रीन पर ही खड़ा करना पड़ता है। यहां तक यात्रियों को लाने और ले जाने के लिए बसों का इस्तेमाल करना पड़ता है। चढ़ने-उतरने के लिए अलग से सीढ़ियां लगानी पड़ती है। जिन यात्रियों को चलने में समस्या होती है वे ज्यादा परेशान होते हैं।
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