कोरोना महामारी की वजह से महीनों तक लगे लॉकडाउन की वजह से अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ा। कई तरह की पाबंदियों की वजह से कई क्षेत्र प्रभावित हुए। इससे उबरने के लिए कई तरह के उपाय भी राज्य और केंद्र सरकार की तरफ से किए जा रहे हैं। उधर मध्य प्रदेश के यात्री बस संचालकों ने व्यापार प्रभावित होने की बात कहकर प्रदेश सरकार से 50 प्रतिशत किराया बढ़ाने की मांग की है।
‘प्राइम रूट बस ऑनर्स एसोसिएशन’ के अध्यक्ष गोविंद शर्मा ने बृहस्पतिवार को यहां कहा, 'कोरोना वायरस संक्रमण के डर से लोग बसों में सफर से घबरा रहे हैं। इससे हमारा कारोबार घटकर 30 प्रतिशत रह गया है। इसके अलावा, डीजल के भाव भी पहले के मुकाबले काफी बढ़ गए हैं।’
उन्होंने कहा, 'इन हालात में हमें लगातार घाटे में बस चलानी पड़ रही है। अगर प्रदेश सरकार ने 30 नवंबर तक यात्री किराए में 50 फीसद वृद्धि नहीं की तो हमारे लिए करीब 35,000 बस चलाते रहना मुश्किल हो जाएगा।'
शर्मा ने कहा कि प्रदेश के किराया बोर्ड की 18 सितंबर को आयोजित बैठक में यात्री बसों का किराया बढ़ाने पर परिवहन विभाग के अधिकारियों और बस संचालकों के बीच सहमति बन गई थी। लेकिन इस बैठक को दो महीने से भी ज्यादा वक्त गुजर जाने के बाद भी किराया नहीं बढ़ाया गया है। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश सरकार ने मई 2018 के बाद से यात्री बसों के किराये में इजाफा नहीं किया है।
शर्मा ने राज्य सरकार से यह मांग भी की कि कोविड-19 संकट के मद्देनजर यात्री बसों को आगामी फरवरी माह तक परिवहन करों से छूट दी जाए।