उज्जैन के मामले में हाईकोर्ट ने फरार आरोपी ज्ञानदास महाराज की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने प्रथम दृष्टया गुरु-शिष्या के बीच संबंधों के साक्ष्य मानते हुए कहा कि आरोपी ने आध्यात्मिक गुरु के रूप में भरोसे का दुरुपयोग किया।
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने उज्जैन के महाकाल थाना क्षेत्र में दर्ज मामले में फरार आरोपी ज्ञानदास महाराज की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। न्यायमूर्ति गजेंद्र सिंह की एकल पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि प्रथम दृष्टया दोनों के बीच संबंध होने के साक्ष्य सामने आए हैं। अदालत ने टिप्पणी की कि आरोपी ने गुरु और शिष्या के बीच के भरोसे का दुरुपयोग किया। आध्यात्मिक गुरु की भूमिका में रहते हुए शिष्या के विश्वास का कथित दुरुपयोग गंभीर प्रकृति का मामला है। ऐसे में आरोपी को अग्रिम जमानत देना उचित नहीं होगा। पुलिस ने इस मामले में 31 जुलाई 2026 को प्राथमिकी दर्ज की थी।
पीड़िता ने आरोप लगाया कि आरोपी ने शादी का वादा कर उसके साथ बार-बार संबंध बनाए, लेकिन बाद में विवाह से इनकार कर दिया और धमकी दी। इसके बाद 1 अगस्त 2026 को उसने उज्जैन के जेएमएफसी न्यायालय के सामने बयान दर्ज कराया। इसमें उसने आरोप लगाया कि आरोपी ने खाने में नशीला पदार्थ मिलाकर उसके साथ संबंध बनाए। पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपी पहले से शादीशुदा है और उसने फ्लैट खरीदने के लिए आर्थिक मदद का आश्वासन दिया था।
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