ग्वालियर में आयोजित संगीत समारोह में पहुंचे सीएम मोहन यादव
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संगीत सम्राट तानसेन की नगरी ग्वालियर में तानसेन संगीत समारोह किया जा रहा है। इसके शुभारंभ पर सीएम मोहन यादव भी पहुंचे थे। इस दिन मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि भारतीय शास्त्रीय संगीत सुनने से मन खिल उठता है। उसमें संवेदना का स्वर भी है। भारतीय शास्त्रीय संगीत से दुनिया के हर वाद्य का सम्बन्ध है। भारतीय कलाकार किसी भी वाद्य के साथ संगत कर सकता है। यही हमारे संगीत की विशेषता है।
उन्होंने कहा कि संगीत का संबंध प्रकृति से है। दुनिया का पहला वाद्य यंत्र डमरू है, जो पानी की बूंद की आवाज का अहसास करता है। डमरू भोले शंकर का भी प्रिय वाद्य था। कृष्ण को भी बांसुरी बजाना पसंद था। जीवन की पहचान संगीत से है। हमारे संगीत से स्पर्श की अनुभूति होती है। जब मनुष्य के प्राण निकल जाते हैं, तो शरीर स्पर्श की अनुभूति नहीं कर पाता, इसलिए कहा जाता है कि रोम रोम में संगीत है।
आयोजन में उपस्थित मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, सीएम मोहन यादव, विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर
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600 दुर्लभ वाद्यों की प्रदर्शनी लगी ग्वालियर में
तानसेन शताब्दी समारोह के अवसर पर विशेष प्रदर्शनियों का आयोजन भी किया जा रहा है। इसमें पुराने कलाकारों की ऑडियो को संगीतप्रेमी सुन सकते हैं। इसके अलावा 600 से अधिक वाद्ययंत्रों की प्रदर्शनी भी लगाई गई है, जिसमें शास्त्रीय, लोक एवं जनजातीय संगीत में प्रयोग किए जाने वाले वाद्ययंत्रों को प्रदर्शित किया जाएगा। प्रदर्शनी में इन वाद्ययंत्रों की सम्पूर्ण जानकारी भी दी जा रही है। इसमें नाग बीन, थुंबा, शहनाई, नगाड़ा सहित कई प्राचीन वाद्य है। लोग इस प्रदर्शनी को काफी पसंद कर रहे है।
राष्ट्रीय तानसेन सम्मान से अलंकृत विभूतियों के व्यक्तित्व पर केन्द्रित छायाचित्र प्रदर्शनी भी आयोजित की गई है। मोती महल में ऑस्कर अवॉर्ड प्राप्त चित्रकार दीपांकर गोस्वामी की ''रागरंग प्रदर्शनी'' आयोजित की गई है। इसमें संगीत की रागों के भाव को दर्शाया गया है।