परिवहन घोटाला और सौरभ शर्मा मामले को लेकर कांग्रेस लगातार मध्यप्रदेश सरकार पर हमलावर है। दो दिन पहले उप नेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे ने पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह पर गंभीर आरोप लगाए थे। शुक्रवार को जीतू पटवारी ने एक नोट शीट का पेज शेयर करते हुए पूछा था कि सौरभ समर्थक कब संन्यास लेंगे और अब पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव ने इस मामले पर सरकार से 10 सवाल किए हैं।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अरुण यादव ने सौरभ शर्मा और परिवहन घोटाले से जुड़े मामले में सरकार पर तीखे सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर सरकार से जवाब मांगते हुए कहा कि घोटाले में मिले 54 किलो सोने, करोड़ों रुपये नकद और बेनामी संपत्ति के मामले में एक महीने के बाद भी कोई बड़ी कार्रवाई सामने नजर नहीं आ रही है। मैंने 20 दिन पहले भी सरकार से कुछ सवाल पूछे थे, जिनके जवाब आज तक नहीं मिले और जांच पर सवाल बरकरार है। अब मैं फिर 10 सवाल सरकार से पूछ रहा हूं।
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सौरभ शर्मा की परिवहन विभाग में हुई अवैध अनुकंपा नियुक्ति को लेकर विभिन्न तरह का प्रमाण सामने आ रहे हैं! यह भी सच है कि यह अवैध नियुक्ति तत्कालीन परिवहन मंत्री के कार्यकाल के दौरान हुई थी, उन्होंने अपने एक बयान (सार्वजनिक हुई वीडियो क्लिपिंग) में स्वीकार किया है कि यह नियुक्ति अवैध थी, अब भूपेंद्र सिंह जी को वह सच्चाई भी उजागर करना चाहिए कि इस अवैध नियुक्ति को उन्होंने किसके दबाव में की और उन पर किस मौजूदा उप मुख्यमंत्री पद पर काबिज नेता ने दबाव बनाकर इस आदेश को जारी करवाया था?
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पूर्व परिवहन मंत्री जब बता रहे हैं कि सरगना कौन है तो अभी तक सरकार उसके नाम का खुलासा क्यों नहीं कर रही है? क्या सरकार को गद्दारों का दबाव है?
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सौरभ शर्मा का अभी तक कोई भी जांच एजेंसी पता क्यों नहीं लगा पाई है कि आखिर वो कहां है?
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क्या जांच एजेंसियों ने जांच पर अघोषित ब्रेक लगा दिया है, क्योंकि अभी तक कोई भी ठोस जानकारी किसी के पास भी नहीं है?
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सौरभ शर्मा के यहां से मिली डायरी को अभी तक सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया? क्या किसी का दबाव जांच एजेंसियों पर है?
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सौरभ शर्मा की विभागीय जांच कौन कर रहा है? अगर नहीं हो रही तो किसके दबाव में नहीं हो रही?
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परिवहन विभाग में एक ही रैंक के दो वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को अलग-अलग पद पर क्यों बिठाया? क्या एक की सेटिंग सीधे दिल्ली से थी?
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तीन एजेंसियों ने छापेमार कार्रवाई की, लेकिन सबके संपत्ति के आंकड़े अलग-अलग क्यों? क्या कोई जांच एजेंसी सौरभ शर्मा को बचाने का कुप्रयास कर रही है?
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जब सौरभ शर्मा की शिकायत ईओडब्लू में हुई थी, तब जांच में उसे क्लीन चिट किसके दबाव में दी गई थी?
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वो कौन राजनेता एवं अफसर है, जो सौरभ शर्मा को संरक्षण दे रहे थे? उनके नामों का खुलासा कब होगा? क्या उन्हीं नेताओं एवं अफसरों से सौरभ शर्मा को जान का खतरा है?