ग्वालियर में एबीवीपी के कार्यकर्ताओं पर लगाए गए डकैती के केस के मामले में मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने संज्ञान लिया है। उन्होंने पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिए हैं कि युवकों पर डकैती की धारा लगाना न्यायोचित नहीं लगता, क्योंकि युवक आपराधिक पृष्ठभूमि के नहीं हैं। यह मानवीय संवेदनाओं से जुड़ा मामला है। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि मेरे संज्ञान में यह बात आई है। यह सही है कि युवकों का तरीका गलत था। संपूर्ण परिस्थितियों को देखते हुए जांच के पश्चात न्यायपूर्ण कार्रवाई किया जाना उचित होगा।
ग्वालियर में जज की कार से बेहोश व्यक्ति को हॉस्पिटल भेजने पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े छात्रों पर केस दर्ज करने के खिलाफ विद्यार्थी परिषद द्वारा अब ग्वालियर के साथ ही प्रदेश भर में चरणबद्ध आंदोलन शुरू कर दिया गया है। एबीवीपी के छात्रों ने जहां माधव कॉलेज पर तालाबंदी की तो एक रोज पूर्व जीवाजी विद्यालय में शांति मार्च भी निकाला। इनका कहना है कि मानवता के लिए किसी व्यक्ति की मदद करने पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के छात्रों के खिलाफ जो कार्रवाई की गई है, वह पूरी तरह गलत है।
आपको बता दें कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े छात्र ग्वालियर में रेलवे स्टेशन पर बीमार पड़े एक बजुर्ग को लेकर पहले जीआरपी थाने और रेलवे अधिकारियों के पास पहुंचे थे। लेकिन जब आधा घंटे तक उनका कोई उपचार नहीं हुआ तो वे स्टेशन से बाहर आए और वहां खड़ी एक जज की कार में उन्हें जबरन लेकर हॉस्पिटल पहुंचे और वहां उपचार शुरू करके उनके परिजनों को इसकी सूचना दी। हालांकि, उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। इस बीच पड़ाव थाना पुलिस ने जज की गाड़ी जबरन ले जाने वाले लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली।