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MP: 60 साल की पीड़िता पलटी, पुलिस ने पेश की खात्मा रिपोर्ट, फिर भी जेल में कटेगी दोषियों की जिंदगी; जानें कैसे

Wed, 12 Feb 2025 03:55 PM IST
उदित दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्वालियर

सार

Gwalior Gang Rape: पीड़िता महिला हलवाइयों के साथ शादी समारोह में पूड़ी बेलने का काम करती थी। 23 मार्च 2021 को दो व्यक्तिों ने उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। कोर्ट में बयान के दौरान महिला पलट गई, डीएनए रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट ने दोनों आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। 
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सामूहिम दुष्कर्म मामले में कोर्ट का फैसला। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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ग्वालियर जिले में 60 साल की महिला के साथ हुए गैंग रेप के मामले में ग्वालियर के जिला कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। बहुचर्चित केस की सुनवाई के दौरान फरियादी महिला मुकर गई। कोर्ट में उसने आरोपियों को पहचानने से ही इंकार कर दिया। पुलिस ने भी इस मामले में खात्मा रिपोर्ट लगा दी। लेकिन, कोर्ट ने इसे अस्वीकार कर सुनवाई की और डीएनए रिपोर्ट के आधार पर दो आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

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जानकारी के अनुसार, पीड़िता महिला हलवाइयों के साथ शादी समारोह में पूड़ी बेलने का काम करती थी। दर्ज रिपोर्ट के अनुसार 23 मार्च 2021 को पीड़िता दोपहर 4 बजे घर पर थी। इस दौरान एक अज्ञात व्यक्ति उसके घर आया उसने कहा कि दिलीप ठेकेदार ने पूड़ी बिलवाने के लिए बुलाया है। दोनों पैदल चलकर गोल पहाड़िया क्षेत्र पहुंचे, जहां उन्हें दिलीप मिला। इसके बाद तीनों टमटम से शीतला माता मंदिर रास्ते पर गए। टमटम कच्चे रास्ते से होते हुए सूनसान क्षेत्र में पहुंचा तो दोनों ने महिला के साथ अश्लील हरकतें करना शुरू कर दिया। इसके बाद दोनों ने बारी बारी से उसके साथ दुष्कर्म किया। महिला के विरोध करने पर उन्होंने चाकू से उस पर कई वार किए। इससे भी उनका मन नहीं भरा तो वे पीड़िता के पैर पर टमटम का पहिया चढ़ाकर भाग गए। 24 मार्च को पीड़िता को होश आया तो वह निर्वस्त्र पड़ी थी। घिसट-घिसटकर वह जैसे-तैसे मुख्य मार्ग पहुंची, जहां लोगों ने उसे कपड़े दिए और फिर पुलिस को सूचना दी। पीड़िता करीब एक सप्ताह अस्पताल में  भर्ती भी रही। पीड़िता ने पुलिस में दर्ज शिकायत में दिलीप का नाम लिया। बाद में अज्ञात व्यक्ति की पहचान राजू के रूप में हुई।

हालांकि, कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान महिला मुकर गई। उसने आरोपियों को पहचानने से भी इंकार कर दिया। पुलिस ने केस में खात्मा रिपोर्ट पेश की, जिसमें उसने दावा किया कि घटना के समय आरोपी एक कार्यक्रम में मौजूद था। लेकिन, पुलिस ऐसा कोई गवाह पेश नहीं कर पाई जिससे ये साबित हो सके कि आरोपियों ने दुष्कर्म नहीं किया था। एक अन्य आरोपी राजू ने पुलिस पर उसे झूठे केस फंसाने का आरोप लगाया। दलील दी कि दिलीप, पार्षद हरि के भाई का दामाद है। दिलीप को बचाने के लिए उसे आरोपी बनाया गया हैं।
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हालांकि, पुलिस की खात्मा रिपोर्ट का कोर्ट में विरोध किया गया। इसके बाद डीएनए रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए गए, जिससे गैंग रेप की पुष्टि हुई। साथ ही यह भी साफ हुआ कि महिला के साथ दिलीप और राजू ने ही सामूहिक दुष्कर्म किया था। इसके बाद विशेष न्यायालय ने महिला के साथ दुष्कर्म करने और चाकू से जानलेवा हमला करने वाले दोनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। 

विशेष न्यायाधीश विवेक कुमार ने दुष्कर्म के दोषी पाए गए टोपी दिलीप उर्फ बालू पान (38) निवासी दर्जी ओली और राजू गाली (56) निवासी बेलदार का पुरा जनकगंज को आजीवन कारावास की सजा सुनाने के साथ ही 60-60 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। अपर लोक अभियोजक मिनी शर्मा ने बताया कि घटना की रिपोर्ट पुलिस थाना गिरवाई में दर्ज कराई गई थी। प्रारंभिक जांच में पुलिस ने पीड़िता द्वारा दिलीप को पहचानने से इनकार करने पर खात्मा रिपोर्ट लगा दी, जिसका न्यायालय में विरोध किया गया। डीएनए रिपोर्ट आई तो यह साफ हुआ कि राजू और दिलीप ने गैंग रेप किया। कोर्ट ने पीड़िता को लाख रुपये की क्षतिपूर्ती देने का भाी आदेश दिया है। सजा सुनाते हुए  विशेष न्यायाधीश विवेक कुमार ने फैसला सुनाते हुए कहा कि दुष्कर्म आत्मा पर ऐसा गहरा घाव, जो जीवन भर नहीं भरता। यह आत्मसम्मान और सामाजिक प्रतिष्ठा को भी नष्ट कर देता है। इसके विरुद्ध समाज की सोच बदलने और संवेदनशील माहौल बनाने की जरूरत है।

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