मध्यप्रदेश के ग्वालियर में नकली प्लाज्मा बेचने के मामले में रोजाना नए खुलासे हो रहे हैं। पुलिस पूछताछ के दौरान आरोपी ने बताया कि वह पानी मिलाकर नकली प्लाज्मा तैयार करता था और उस पर जेएएच की फर्जी सील लगा देता था। यह सील उसने सिर्फ 40 रुपये में बनवाई थी। आरोपी के खुलासे से पुलिस भी हैरान है।
ऐसे करता था घिनौनी करतूत
इंसान की जान की कीमत नहीं समझने वाले नकली प्लाज्मा गिरोह के सरगना अजय शंकर त्यागी ने पूछताछ के दौरान पुलिस के सामने कई अहम राज उगले। उसने ब्लड बैग खरीदने से लेकर प्लाज्मा बनाने और उस पर सील लगाने का तरीका भी बताया। आरोपी ने बताया कि वह नई सड़क स्थित सिस्को लैब से 200 रुपये में खाली ब्लड बैग खरीदता था। इसमें पानी मिला प्लाज्मा भरा जाता था और यही ब्लड बैग कोरोना संक्रमित मरीजों के परिजनों को बेच दिया जाता था।
अनुभव का उठाया फायदा
आरोपी ने बताया कि उसने करीब दस साल पहले रेडक्रॉस में काम किया था। तब से वह लगातार खून की खरीद-फरोख्त में शामिल है। हालांकि, इस गोरखधंधे में वह जनवरी 2020 के दौरान पकड़ा गया और जेल में डाल दिया गया। वहीं, लॉकडाउन लगने से कुछ दिन पहले वह जेल से छूट गया। खून के धंधे में माहिर होने के चलते अजय शंकर ने अब प्लाज्मा का गोरखधंधा शुरू कर दिया। इसके लिए उसने ओल्ड हाईकोर्ट के पास सील बनाने वाले से जेएएच की फर्जी सील बनवा लीं। एक सील के लिए उसने सिर्फ 40 रुपये खर्च किए। वहीं, एक प्रिंटिंग प्रेस से क्रॉस मैच रिपोर्ट और अन्य रसीदें छपवा लीं।
ऐसे बनाता था नकली प्लाज्मा
अजय शंकर ने पूछताछ के दौरान बताया कि वह एक यूनिट प्लाज्मा खरीदता था, जिसे वह डिस्टिल्ड वॉटर और नॉर्मल सलाइन मिलाकर बढ़ा लेता था। इसके बाद वह एक बैग प्लाज्मा से 4-5 बैग प्लाज्मा बना लेता था, जिसे मरीजों के परिजनों को बेच देता था। आरोपी के मुताबिक, कुछ निजी अस्पतालों के कर्मचारियों से उसकी दोस्ती है। ऐसे में उसने उन्हें भी अपने गिरोह में शामिल कर लिया और घटिया प्लाज्मा बेचने लगा।
पुलिस कर रही मामले की जांच
आरोपी से पूछताछ के दौरान पुलिस के हाथ कुछ निजी लैब के नाम भी लगे हैं, जिनमें रेडक्रॉस और राधास्वामी ब्लड बैंक शामिल हैं। पुलिस इन लैब तक पहुंचने के लिए सीसीटीवी कैमरे भी खंगाल रही है। पुलिस के मुताबिक, मामले की जांच जारी है।