ग्वालियर हाईकोर्ट ने ससुराल से अलग रह रही महिला को परामर्श दिया है कि वह सात दिन तक ससुराल में रहकर परिवार को फिर से जोड़ने की कोशिश करे। महिला बच्चों की कस्टडी मांगने कोर्ट पहुंची थी।
बता दें कि ग्वालियर की युवती का विवाह मुरैना के गणेशपुरा में 10 साल पहले हुआ था। उसकी दो संतानें भी हैं। कुछ कारणों से वह ससुराल छोड़कर मायके में रह रही है। उसके दोनों बेटे पिता के साथ मुरैना में हैं। बेटों की बच्चों की कस्टडी लेने के लिए महिला ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की ग्वालियर खंडपीठ में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका लगाई। याचिका में अनुरोध किया कि सास ने बच्चों को अवैधानिक रूप से अपनी गिरफ्त में रखा हुआ है। सुनवाई में न्यायमूर्त आनंद पाठक ने उसके ससुराल परिवार को भी कोर्ट में बुलवाया। महिला ने ससुराल वालों पर आरोप लगाया था कि वह दुर्व्यवहार करते हैं, इसलिए वह मायके में रह रही है। खंडपीठ में सास से इस संबंध में पूछा तो तो उन्होंने साफ इनकार कर दिया। न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद उम्मीद जताई कि परिवार दोबारा सुख शांति से एक साथ निर्वाह कर सकता है।
न्यायालय ने इसी उम्मीद के साथ याचिकाकर्ता को आदेश दिया है कि वह एक सप्ताह तक अपनी ससुराल में पति व बच्चों के साथ रहे। ससुराल पक्ष को भी चेतावनी दी गई है कि इस दौरान याचिकाकर्ता को किसी भी तरह की प्रताड़ना या क्षति नहीं पहुंचाई जाए। ससुराल परिवार के अनुरोध पर उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ता को भी शांतिपूर्ण व्यवहार करने की हिदायत दी है। दोनों पक्षों के प्रस्ताव मानने के बाद उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ता को ससुराल में रह कर प्रतिदिन मुरैना से ग्वालियर अपने सेवास्थल पर आने जाने की मोहलत देने के भी निर्देश दिए हैं। अब एक सप्ताह बाद इस मामले में दोबारा सुनवाई की जाएगी।