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Guna News: नपा अध्यक्ष ने उपाध्यक्ष सहित सात पार्षदों पर किया मानहानि का मुकदमा, छवि खराब करने का आरोप

Wed, 25 Feb 2026 08:32 PM IST
गुना ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुना

सार

गुना नगर पालिका अध्यक्ष सविता गुप्ता ने उपाध्यक्ष धर्मेंद्र सोनी सहित सात पार्षदों पर मानहानि का मुकदमा दायर किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्षद झूठे आरोप व वीडियो के जरिए छवि खराब कर विकास कार्य बाधित कर रहे हैं। लगातार शिकायतों से मानसिक प्रताड़ना का हवाला देते हुए उन्होंने न्यायालय से न्याय की उम्मीद जताई।
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गुना नगर पालिका में घमासान अध्यक्ष ने उपाध्यक्ष सहित सात पार्षदों पर किया मानहानि का मुकदमा
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विस्तार
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नगर पालिका परिषद गुना में सियासी घमासान अब न्यायालय तक पहुंच गया है। नपा अध्यक्ष सविता अरविंद गुप्ता ने उपाध्यक्ष धर्मेंद्र सोनी सहित सात पार्षदों के विरुद्ध न्यायालय में मानहानि का मुकदमा दायर किया है। अध्यक्ष ने आरोप लगाया है कि संबंधित पार्षद लगातार झूठे और मिथ्या आरोप लगाकर उनकी व्यक्तिगत छवि तथा पार्टी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं।

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अध्यक्ष ने कहा कि उपाध्यक्ष और कुछ पार्षद राजनीतिक लाभ लेने के उद्देश्य से निराधार आरोपों का सहारा ले रहे हैं। उनके अनुसार, ये पार्षद भाजपा की परिषद में कांग्रेस के कुछ सदस्यों के साथ मिलकर न केवल विकास कार्यों में बाधा डाल रहे हैं, बल्कि जिला प्रशासन के समक्ष भी भ्रामक शिकायतें प्रस्तुत कर दबाव बनाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि पूर्व में कलेक्टर न्यायालय में की गई शिकायतें जांच में असत्य पाई गई थीं और खारिज कर दी गई थीं।

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छवि खराब करने का प्रयास
अध्यक्ष ने यह भी बताया कि इससे पहले भी उन्होंने उपाध्यक्ष के विरुद्ध मानहानि का प्रकरण दर्ज कराया था, जिसे पार्टी संगठन और वरिष्ठ नेताओं के आश्वासन पर वापस ले लिया गया था। उनका कहना है कि समझौते और आश्वासन के बावजूद आरोपों का सिलसिला नहीं थमा। उन्होंने आरोप लगाया कि एक वायरल वीडियो के माध्यम से भी उनकी छवि खराब करने का प्रयास किया गया, जिसमें बयान देने वाले व्यक्ति ने पुलिस के समक्ष कथित रूप से स्वीकार किया था कि वीडियो फर्जी तरीके से तैयार कराया गया था। इसके बावजूद संबंधितों पर कार्रवाई नहीं हुई।
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मानसिक प्रताड़ना
अध्यक्ष का कहना है कि लगातार झूठे आरोपों और शिकायतों के कारण उन्हें मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने इसे एक महिला जनप्रतिनिधि के सम्मान से जुड़ा मामला बताते हुए कहा कि पार्टी के भीतर अनुशासनहीनता पर समय-समय पर नोटिस दिए गए, किंतु स्थिति में सुधार नहीं हुआ। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब पार्टी संगठन और वरिष्ठ नेतृत्व से अपेक्षित संरक्षण नहीं मिला, तब उन्हें न्यायालय की शरण लेने के लिए बाध्य होना पड़ा। अध्यक्ष ने विश्वास जताया कि न्यायालय से उन्हें न्याय मिलेगा और सत्य सामने आएगा। इस घटनाक्रम के बाद नगर पालिका की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। यह मामला न केवल परिषद की कार्यप्रणाली, बल्कि स्थानीय राजनीतिक समीकरणों पर भी प्रभाव डाल सकता है।

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