यही कार है जिसमें पैसे ले जाए जा रहे थे
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80 लाख रुपये के साथ वाहन को जाने दिया
आरोप है कि इतनी बड़ी रकम मिलने के बाद नियमानुसार आयकर विभाग या वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना देने के बजाय मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने कथित रूप से समझौते का रास्ता अपनाया। सूत्रों के मुताबिक, पुलिस और कारोबारी के बीच करीब 20 लाख रुपये में ‘डील’ तय हुई। आरोप यह भी है कि पुलिस ने यह राशि अपने पास रख ली और शेष करीब 80 लाख रुपये के साथ वाहन को जाने दिया गया। मामले में एक और नाटकीय मोड़ तब आया, जब यह चर्चा सामने आई कि गुजरात के एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी के फोन के बाद पुलिस ने कथित रूप से लिए गए 20 लाख रुपये भी जल्दबाजी में लौटा दिए। हालांकि, इस बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन इससे मामला और अधिक संदिग्ध हो गया है।
जैसे ही यह मामला सोशल मीडिया और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बना, पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डीआईजी अमित सांघी देर रात धरनावदा थाना और रूठियाई चौकी पहुंचे। उन्होंने मौके पर मौजूद रिकॉर्ड खंगाले और घटना के समय ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों के अलग-अलग बयान दर्ज किए। पूछताछ के दौरान डीआईजी ने कड़े सवाल किए और यह जानने का प्रयास किया कि इतनी बड़ी बरामदगी को आधिकारिक रिकॉर्ड में क्यों दर्ज नहीं किया गया और बिना वैधानिक कार्रवाई के वाहन को किसके निर्देश पर छोड़ा गया।
क्या बोले डीआईजी?
डीआईजी अमित सांघी ने कहा कि प्रथम दृष्टया मामला संदिग्ध प्रतीत होता है। वाहन चेकिंग के दौरान आवश्यक वैधानिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया, इसलिए विस्तृत जांच के आदेश दिए गए हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मामले में गहराई से जांच की जाएगी, क्योंकि अभी तक वाहन चालक या मालिक की ओर से कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है। प्राथमिक जांच के आधार पर धरनावदा थाना प्रभारी प्रभात कटारे, रूठियाई चौकी प्रभारी एएसआई साजिद हुसैन, प्रधान आरक्षक देवेंद्र सिकरवार और पुलिस वाहन चालक सह आरक्षक सुंदर रमन को निलंबित कर दिया गया है। डीआईजी ने कहा कि जांच पूरी होने के बाद ही सच्चाई सामने आएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
गुना मामले में पुलिस ने थाना प्रभारी समेत चार को निलंबित कर दिया था।
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