कद छह फुट। लंबे बाल, बड़ी और घनी मूछें। काला चश्मा, माथे पर लाल तिलक। जी हां, ये हैं चंबल घाटी के आत्मसमर्पित पूर्व दस्यु सरगना मलखान सिंह।
कभी चंबल के बीहड़ों पर राज करने वाले मलखान भी भिंड-दतिया और ग्वालियर सीट पर भाजपा के लिए वोट मांग रहे है।
जब पत्रकारों ने उनसे भाजपा का ही प्रचार करने का कारण पूछा तो मलखान ने कहा कि हमारा समर्पण 1982 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के समय हुआ।
मंच पर तो सभी शर्ते मान ली, लेकिन जैसे ही मंच से उतरे हमारी शर्तों को मानने से इंकार कर दिया। कांग्रेस ने हमारे साथ वादा खिलाफी की थी।
बागियों को जमीन नहीं दी। 65 साल में कोई भी विकास नहीं किया। इसलिए मैं भाजपा का प्रचार कर रहा हूं।
इस प्रश्न पर कि जिन गांवों के लोगों ने आपको बागी देखा, अब आप उन्हीं गांवों में वोट मांगने जा रहे है? मलखान ने कहा कि मेरी किसी से व्यक्तिगत लड़ाई नहीं थी। इसलिए लोगों से सम्मान भी मिलता है।