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MP News: धार में RSS शताब्दी वर्ष पर 14 बस्तियों में हिंदू सम्मेलन, समाज जागरण और नारी शक्ति की दिखी झलक

Sun, 04 Jan 2026 08:51 PM IST
धार ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, धार

सार

धार में RSS के शताब्दी वर्ष के अवसर पर 4 जनवरी को शहर की 14 बस्तियों में एक साथ हिंदू सम्मेलन आयोजित किए गए। हजारों परिवारों की उपस्थिति, महिलाओं की सक्रिय भागीदारी और समाज जागरण व सांस्कृतिक उत्थान का महाअभियान बना दिया।

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हिंदू सम्मेलन कार्यक्रम। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में रविवार, 4 जनवरी को धार में ऐतिहासिक हिंदू सम्मेलनों का आयोजन किया गया। शहर की 14 बस्तियों में एक साथ आयोजित यह भव्य सम्मेलन दर्शाता है कि धार की सामाजिक चेतना, संगठन शक्ति और सांस्कृतिक विरासत आज भी पूरी तरह जीवंत है। यह विगत 100 वर्षों में प्रथम अवसर था जब हजारों हिंदू परिवार एक साथ एकत्रित हुए और पूरा नगर हिंदुत्व, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक गौरव के रंग में रंगा नजर आया।

सांस्कृतिक जागरण और सामाजिक समरसता का महाकुंभ

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सम्मेलनों में शहरी क्षेत्रों के हजारों परिवारों की उपस्थिति ने इसे केवल एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखा, बल्कि समाज जागरण का महाअभियान बना दिया। वरिष्ठ कार्यकर्ताओं, प्रबुद्ध नागरिकों, समाजजनों और साधु-संतों की मौजूदगी ने कार्यक्रम की गरिमा को नई ऊँचाइयाँ दीं। वक्ताओं ने राष्ट्र निर्माण में हिंदू समाज की भूमिका, सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण और परिवार संस्था की मजबूती पर विस्तार से प्रकाश डाला।

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नारी शक्ति की अग्रणी भूमिका

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सम्मेलनों की सबसे विशेष बात महिलाओं की सक्रिय भागीदारी रही। बड़ी संख्या में महिलाओं ने न केवल उपस्थित होकर योगदान दिया, बल्कि आयोजन के विचार और व्यवस्था के स्तर पर भी सक्रिय भूमिका निभाई। महिला वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि संस्कारवान समाज की नींव घर से ही पड़ती है और इसमें महिलाओं की भूमिका निर्णायक है। उन्होंने परिवार संस्था की मजबूती, बच्चों में संस्कार निर्माण, सामाजिक समरसता और सेवा भाव को जीवन का अंग बनाने पर जोर दिया।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित इन सम्मेलनों में ‘पंच परिवर्तन’ को समाज परिवर्तन का मूल मंत्र बताया गया। वक्ताओं ने कहा कि पंच परिवर्तन केवल विचारधारा नहीं, बल्कि दैनिक जीवन में अपनाए जाने वाले व्यवहारिक बदलाव हैं, जिनसे सशक्त और संगठित समाज का निर्माण होता है।

इन सम्मेलनों ने धार में सामाजिक चेतना, सांस्कृतिक जागरण और हिंदू समाज की संगठन शक्ति का ऐतिहासिक दृष्टांत पेश किया।

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