आदिवासी बाहुल्य कुक्षी तहसील के ग्राम आशपुर में एक 16 वर्षीय नाबालिग किशोरी के अपहरण और दुष्कर्म के मामले में स्थानिय पुलिस की लापरवाही का मामला सामने आया है। एक तरफ पीड़ित परिवार न्याय के लिए दर-दर भटकता रहा, वहीं दूसरी तरफ पुलिस अधिकारी मैडम छुट्टी पर हैं और 'कल आना जैसे बहाने बनाकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते नजर आई। हालांकि जब घटना की जानकारी वरिष्ठ अधिकारी को लगी तो मामले में प्रकरण दर्ज हुआ है।
जंगल में दरिंदगी
घटना 28 मई की रात करीब 1 बजे की है। पीड़िता अपने माता-पिता के साथ घर के आंगन में सो रही थी। इसी दौरान ग्राम उण्डली का सरपंच सुनील पिता मोहन मोरी अपने साथी अर्जुन पिता बापू, निवासी लुन्हेरा के साथ वहां पहुंचा। आरोपियों ने सोते समय पीड़िता का मुंह दबाया और उसे जबरन गाड़ी में बैठाकर भुवानीपुरा के जंगलों में ले गए। वहां मुख्य आरोपी सरपंच सुनील ने पीड़िता के साथ दो-तीन बार दुष्कर्म किया, जबकि उसका साथी अर्जुन गाड़ी में ही निगरानी करता रहा। वारदात के बाद आरोपी ने पीड़िता को जान से मारने की धमकी दी और घटना के करीब दो घंटे बाद उसे गांव के बाहर छोड़कर फरार हो गए। पीड़िता के घर पर मुर्गे का मांस बेचने की दुकान होने के कारण आरोपी अक्सर वहां आते थे, जिससे पीड़िता उन्हें पहले से जानती थी।
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खौफ में बीती रात
आरोपी की धमकी से डरी-सहमी पीड़िता जब घर पहुंची, तो अत्यधिक डर के कारण उसने रात में किसी को कुछ नहीं बताया। अगले दिन शाम को जब मां ने कड़ाई से पूछताछ की, तो पीड़िता ने अपनी आपबीती सुनाई। इसके बाद परिजनों ने तुरंत वर्तमान सरपंच को मामले की जानकारी दी और थाने पहुंचे। पीड़ित परिवार के अनुसार रात को हमारी बच्ची को सुनील सरपंच उठा ले गया। जब हम कल शाम 6 बजे थाने आए और टीआई को फोन लगाया, तो कहा गया कि मैडम छुट्टी पर हैं, वे ही रिपोर्ट लिखेंगी, कल 11 बजे आना। अगले दिन फिर फोन लगाया तो बहाने बनाए गए। हालांकि बाद में शिकायत के बाद आखिरकार पुलिस ने मुख्य आरोपी सरपंच सुनील और उसके साथी अर्जुन के खिलाफ अपहरण, दुष्कर्म, पॉक्सो एक्ट और जान से मारने की धमकी देने सहित विभिन्न गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू की है।