केंद्रीय पुरातत्व विभाग के अधीन धार की भोजशाला में महासत्याग्रह का आयोजन किया गया। हाईकोर्ट के निर्णय और एएसआई की नई गाइडलाइन के बाद यह पहला मंगलवार था, जिसके चलते बड़ी संख्या में हिंदू समाज के लोग भोजशाला पहुंचे। एक दिन पूर्व ही भोज उत्सव समिति ने शहरवासियों से महासत्याग्रह में शामिल होने का आह्वान किया था। भोजशाला को मंदिर का दर्जा मिलने के बाद से समाज में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।
धार सहित आसपास के जिलों से भी लोग दर्शन और पूजन के लिए पहुंच रहे हैं। भोज उत्सव समिति के पदाधिकारी अन्य जिलों से आने वाले श्रद्धालुओं को भोजशाला के प्राचीन स्तंभों और शिलालेखों की विस्तृत जानकारी दे रहे हैं। इधर, सर्वे के दौरान उत्खनन में भोजशाला परिसर से मिली 94 मूर्तियों को पुनः स्थापित किए जाने की मांग हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने एएसआई से की है। दरअसल, रविवार को हिंदू समाज द्वारा भोजशाला में मां वाग्देवी के प्रतीक स्वरूप की स्थापना कर पूजन की शुरुआत की गई थी। इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ, जब पूरे 24 घंटे मां का स्वरूप भोजशाला में विराजमान रहा और अखंड ज्योति प्रज्वलित रही। पिछले तीन दिनों से समाज द्वारा प्रतिदिन मां का पूजन किया जा रहा है।
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