धाराजी से उज्जैन के लिए निकली कांवड़ यात्रा
- फोटो : Amar Ujala
धाराजी से उज्जैन के लिए निकली कावड़ यात्रा इन दिनों आस्था के साथ-साथ जीवों के प्रति संवेदनशीलता का संदेश भी दे रही है। यात्रा में 200 से अधिक कावड़िए शामिल हैं। जिले के विभिन्न क्षेत्रों से होते हुए कावड़ यात्रा सोमवार को देवास पहुंची। इस दौरान यात्रा में शामिल एक घायल स्वान (कुत्ता) लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बना रहा। घायल होने के बावजूद स्वान कावड़ यात्रियों के साथ लगातार कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ रहा है।
कांवड़ यात्रा में शामिल हुआ स्वान
कावड़ यात्रियों ने बताया कि जब यात्रा धाराजी से शुरू हुई थी, तभी यह स्वान भी उनके साथ हो लिया था। कुछ समय पहले सड़क दुर्घटना में स्वान घायल हो गया था। उसके शरीर पर चोट होने के बावजूद वह कावड़ यात्रियों का साथ छोड़कर नहीं गया। कावड़ यात्रियों ने उसकी हालत देखकर उसे अपने साथ रख लिया और उसके उपचार की व्यवस्था की। इसके बाद से यात्रा के दौरान उसकी लगातार देखभाल की जा रही है। कावड़ यात्रियों के अनुसार, स्वान अब यात्रा का हिस्सा बन चुका है। रास्ते में जहां भी उसे परेशानी होती है, वहां कावड़िए उसकी मदद करते हैं। उसके खाने-पीने और उपचार का भी ध्यान रखा जा रहा है। यात्रा के दौरान स्वान को अपने साथ चलते देख राहगीर और स्थानीय लोग भी रुककर उसे देखने लगे। कई लोगों ने कावड़ियों की इस पहल की सराहना की।
आस्था के साथ सेवा और संवेदना का संदेश
कावड़ यात्रियों ने बताया कि उनका उद्देश्य भगवान शिव के प्रति आस्था और भक्ति के साथ उज्जैन पहुंचकर जलाभिषेक करना है। वहीं, घायल स्वान को यात्रा में अपने साथ रखना उनके लिए सेवा और संवेदना का विषय है। उनका कहना है कि जब एक बेजुबान जीव मुश्किल समय में उनका साथ दे रहा है, तो उसकी मदद करना भी उनका कर्तव्य है। कावड़ियों ने बताया कि स्वान को उज्जैन तक अपने साथ ले जाया जाएगा। घायल होने के बावजूद उसका उत्साह और यात्रियों के साथ लगातार चलना लोगों के लिए कौतूहल का विषय बना हुआ है। यात्रा मार्ग में स्वान को देखने के लिए लोग उत्सुक नजर आ रहे हैं।
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उज्जैन तक जाएगी कांवड़ यात्रा
धाराजी से शुरू हुई यह कावड़ यात्रा जिले के विभिन्न क्षेत्रों से होकर उज्जैन की ओर बढ़ रही है। यात्रा में शामिल कावड़िए भगवान शिव की भक्ति में आगे बढ़ रहे हैं। वहीं, घायल स्वान की सेवा कर वे यह संदेश भी दे रहे हैं कि आस्था के साथ जीव-जंतुओं के प्रति दया, सेवा और संवेदनशीलता भी जरूरी है।