जिले के झिर का बाग इलाके में सामने आई घटना अब सिर्फ श्मशान घाट में किए गए एक कुत्सित कार्य तक सीमित नहीं रही, बल्कि अंधविश्वास, मानसिक पीड़ा और समाज द्वारा कानून अपने हाथ में लेने की भयावह तस्वीर बनकर उभरी है। एक युवक के अंधविश्वासी कदम के बाद जो हुआ, उसने इंसानियत, कानून और संवैधानिक मूल्यों को कठघरे में खड़ा कर दिया है।
सिविल लाइन थाना क्षेत्र के झिर का बाग निवासी 72 वर्षीय मूलचंद कुशवाह की बीमारी के चलते मौत हो गई थी। शाम को परिजन और समाज के लोग परंपरागत रीति-रिवाजों के अनुसार श्मशान घाट पहुंचे और अंतिम संस्कार संपन्न कराया। इस दौरान आरोपी बल्ली कुशवाह भी वहां मौजूद था। वह शॉल ओढ़े खड़ा रहा और पूरे घटनाक्रम में शामिल रहा। करीब एक घंटे बाद जब सभी लोग अपने-अपने घर लौट गए तो रात करीब 11 बजे 40 वर्षीय बल्ली कुशवाह, पुत्र तुलसी कुशवाह, दोबारा श्मशान घाट पहुंचा। आरोप है कि उसने जलती चिता की लकड़ियों को फैलाया, राख को इधर-उधर बिखेरा और श्मशान की राख से स्नान किया। इसके बाद मृतक मूलचंद कुशवाह की खोपड़ी और कुछ अस्थियां उठाकर पॉलीथिन में रखीं और उन्हें अपने घर ले गया। बताया जाता है कि उसने पूरी रात उन अस्थियों के साथ कमरे में बिताई और वहीं सोया।
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अगली सुबह जब मृतक के परिजन और समाज के लोग चिता की राख और अस्थियों के विसर्जन के लिए श्मशान घाट पहुंचे तो चिता की राख बिखरी हुई थी और खोपड़ी गायब थी। खोजबीन के दौरान मौके पर एक शॉल मिली, जो बल्ली की बताई जा रही है। शक गहराया तो वार्ड क्रमांक-1 के पार्षद कल्लू कुशवाह को सूचना दी गई। पार्षद द्वारा पूछताछ करने पर बल्ली ने अपना कृत्य स्वीकार कर लिया और घर में रखी अस्थियां भी पॉलीथिन में बरामद कराईं। सूचना मिलते ही सिविल लाइन थाना पुलिस मौके पर पहुंची और आरोपी बल्ली कुशवाह को गिरफ्तार कर लिया।
क्यों किया ऐसा?
बल्ली के भतीजे राजकुमार कुशवाह के अनुसार बल्ली की पारिवारिक पृष्ठभूमि बेहद दर्दनाक रही है। उसकी शादी करीब 20 साल पहले हुई थी, लेकिन कोई संतान नहीं हुई तो उसने दूसरी शादी कर ली। दूसरी शादी से उसे दो बच्चे हुए, लेकिन दोनों की मृत्यु हो गई। करीब डेढ़ साल पहले दूसरी पत्नी भीउसे छोड़कर चली गई, फिलहाल पहली पत्नी उसके साथ रहती है।
राजकुमार का कहना है कि बल्ली शराब पीने का आदी है और लंबे समय से मानसिक तनाव में है। उसका इलाज भी चल रहा है। कुछ समय पहले वह भितरवार गया था, जहां किसी कथित जनवा ने उसे सलाह दी कि संतान उत्पत्ति के लिए उसे श्मशान की राख से स्नान करना चाहिए। इसी अंधविश्वास के चलते उसने यह कृत्य किया।
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समाज ने सुनाया फैसला
पुलिस की कार्रवाई के बाद भी मामला शांत नहीं हुआ। आरोप है कि मोहल्ले के लोगों ने बल्ली को चप्पलों की माला पहनाकर पूरे इलाके में घुमाया। इसके बाद समाज ने पंचनामा तैयार कर बल्ली कुशवाह और उसके पूरे परिवार को सामाजिक रूप से बहिष्कृत कर दिया।
पंचनामा में यह भी दर्ज किया गया कि यदि समाज का कोई व्यक्ति बल्ली या उसके परिवार से संबंध रखेगा या उन्हें अपने घर बुलाएगा तो उस पर 5,100 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। इस पंचनामा पर लालाराम, ज्वाला, अतर सिंह, रतन, राजू, प्रकाश, रामकिशुन, भज्जू सहित समाज के कई वरिष्ठ सदस्यों के हस्ताक्षर बताए जा रहे हैं।
समाज के इस फैसले के बाद सिर्फ बल्ली ही नहीं, उसकी पत्नी और परिवार के अन्य सदस्य भी सामाजिक तिरस्कार और अलगाव झेलने को मजबूर हो गए हैं, जबकि उनका इस कृत्य से कोई सीधा संबंध नहीं था। आरोपी के साथ उसके परिवार के सामाजिक बहिष्कार ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनका जवाब आना अभी बाकी है।