फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Damoh News: 600 साल पुराने मछरया कुएं से है वार्ड की पहचान, अब उसे संरक्षण की दरकार

सार

596 वर्ष पुराने इस कुएं का निर्माण सन 1428 में हुआ था। शिलालेख कुछ वर्ष पहले तक यहां लगे थे। यह कुआं किसी जमाने में लोगों के पेयजल का प्रमुख साधन था। अब इसकी पहचान संकट में है।  
विज्ञापन
जर्जर हो गई कुएं की दीवार
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

दमोह शहर में अनेक प्राचीन कुएं-बावड़ियां हैं, जिनका संरक्षण न होने से उनका अस्तित्व खत्म होता जा रहा है। इनमें से ही पुराना बाजार स्थित 1428 में बना मछरया कुआं भी है जो शहर का सबसे प्राचीन कुआं है। इस कुएं से ही वार्ड पहचाना जाता है। यहां कभी मछली बेची जाती थी जिससे कुएं को पहचान मिली।

विज्ञापन


596 वर्ष प्राचीन इस कुएं का निर्माण सन 1428 में किया गया था। शिलालेख कुछ वर्ष पहले तक यहां थे। 25 साल पहले यह कुआं लोगों के पेयजल का प्रमुख साधन था। पानी नीचे पहुंचने पर लोग सीढ़ियों के सहारे नीचे उतरकर पानी भरते थे। पहले इस कुएं के पास मछली बेची जाती थी, इसलिए इसका नाम मछरया कुआं पड़ गया। पुराना बाजार दो स्थित इस कुएं से ही इस वार्ड की पहचान है। यदि किसी को पुराना बाजार के पते पर जाना है तो उसे मछरया कुआं का नाम लेना पड़ता है।  

वर्तमान में यह कुआं चारों ओर से जर्जर हो गया है। इसकी दीवारें कमजोर होकर एक तरफ से गिरने लगी हैं। इसके आसपास रहने वाले लोगों को खतरा बना हुआ है। यहां एक आंगनवाड़ी केंद्र भी है। स्थानीय निवासी सोनू, आनंद नामदेव, देवेश खरे ने बताया कि प्रशासन को समय रहते इस कुएं का जीर्णोद्धार कराना चाहिए। इसके चारों ओर सुरक्षा के प्रबंध करना चाहिए ताकि कोई बड़ा हादसा न हो सके। रानी दुर्गावती संग्रहालय के परिचायक सुरेंद्र चौरसिया ने बताया कि यह कुआं पुरातत्व के अधीन नहीं आता। इस वजह से संरक्षित नहीं है। कुएं के प्राचीन होने की जानकारी उनके रिकार्ड में नहीं है। लेकिन कुएं का नाम बहुत प्रचलित है इसका संरक्षण होना बेहद जरूरी है।

विज्ञापन
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें