जन क्रांति न्याय आंदोलन।
- फोटो : अमर उजाला
बता दें यह आंदोलन 12-13 जुलाई को करणी सेना परिवार एवं राजपूत समाज के लोगों पर हुए पुलिस लाठीचार्ज के विरोध को लेकर है। प्रशासन ने आंदोलन के आयोजन के लिए नेहरू स्टेडियम में कार्यक्रम की अनुमति दी है। समाज की ओर से 21 सूत्रीय मांगें रखी गई हैं।
ये भी पढ़ें- आज से भोपाल मेट्रो में आम जनता होगी सवार, सुबह 9 बजे से शाम 7 बजे तक चलेगी, सुरक्षा के सख्त नियम
नेहरू स्टेडियम में उमड़ा जनसैलाब।
- फोटो : अमर उजाला
आंदोलन में बढ़ती भीड़ को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। नेहरू स्टेडियम और आसपास के पूरे इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। फिलहाल माहौल शांतिपूर्ण बना हुआ है, लेकिन प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए है।
नेहरू स्टेडियम में उमड़ा जनसैलाब।
- फोटो : अमर उजाला
यहां से शुरू हुआ विवाद
इस आंदोलन की तैयारी पिछले तीन महीनों से जारी है। करणी सेना आंदोलन की रूपरेखा तैयार करने के लिए गांव-गांव जाकर जन जागरण अभियान चला रखा है। दरअसल विवाद की वजह है एक हीरा है। राजपूत समाज के एक युवक ने एक व्यापारी से हीरे का सौदा किया था, लेकिन व्यापारी ने हीरे की खरीद में धोखाधड़ी की। आरोप है कि व्यापारी ने युवक को असली हीरे के बदले नकली हीरा थमा दिया था। थाने में शिकायत की गई मगर कार्रवाई नहीं हुई तो करणी सेना सक्रिय हुई। पुलिस पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाते हुए थाने का घेराव किया गया। इस विरोध के दौरान पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे लोगों पर लाठियां बरसा दीं। करणी सेना के प्रमुख जीवन सिंह शेरपुर पर भी लाठीचार्ज किया गया। उन्हें एक दिन के लिए जेल बंद किया गया। इसके बाद से 21 दिसंबर को हरदा में बड़े आंदोलन की तैयारी की गई।
जन क्रांति न्याय आंदोलन।
- फोटो : अमर उजाला
पहली बार हरदा में इतनी बड़ी भीड़
करणी सेना के इस आंदोलन में मध्य प्रदेश के लगभग सभी जिलों के साथ-साथ अन्य राज्यों से भी लोग पहुंचे हैं। आयोजकों के अनुसार, करीब 50 हजार से अधिक लोग नेहरू स्टेडियम में मौजूद हैं। हालात यह रहे कि स्टेडियम में लोगों को बैठने तक की जगह नहीं मिल पा रही है। हरदा में यह पहला मौका है जब किसी आंदोलन में इतनी बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हुए हैं।
करणी सेना प्रमुख भूख हड़ताल पर
करणी सेना प्रमुख जीवन सिंह शेरपुर 21 सूत्रीय मांगों को लेकर 14 दिसंबर से भूख हड़ताल पर हैं। आंदोलन के दौरान भूख हड़ताल पर बैठने वालों की संख्या बढ़ सकती है। हालांकि जिला प्रशासन ने आंदोलन के लिए केवल एक दिन की अनुमति दी है, लेकिन जीवन सिंह शेरपुर का कहना है कि
“जब तक सरकार हमारी मांगें नहीं मानती, आंदोलन जारी रहेगा।” अब प्रशासन आगे क्या कदम उठाएगा, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
लाठीचार्ज की घटना से उपजा आक्रोश
मामले की शुरुआत एक राजपूत युवक द्वारा हीरा खरीदे जाने से हुई थी। आरोप है कि व्यापारी ने असली हीरे की जगह नकली हीरा थमा दिया। युवक ने थाने में शिकायत भी की, लेकिन कार्रवाई नहीं होने से नाराज करणी सेना के कार्यकर्ताओं ने 12 और 13 जुलाई को थाने का घेराव किया। इस दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज किया, जिसमें करणी सेना प्रमुख जीवन सिंह शेरपुर भी घायल हुए थे। तभी से समाज में भारी आक्रोश बना हुआ है।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
जन क्रांति आंदोलन को देखते हुए जिला प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरे शहर में कड़ी निगरानी रखी जा रही है। प्रशासन ने 5 स्तरीय सुरक्षा घेरा बनाया है। प्रदर्शन स्थल से लेकर जिले के सभी प्रवेश और निकास मार्गों पर पुलिस बल तैनात है। एक दिन पहले पुलिस ने फ्लैग मार्च भी निकाला, जिसमें 3 जिलों की पुलिस और 10 कंपनियां शामिल रहीं।