दमोह जिले के तेंदूखेड़ा ब्लॉक का जरूआ गांव यहां के किसान केवल एक फसल उगा पाते हैं और उसके बाद बेराेजगार हो जाते हैं। क्योंकि दूसरे फसल के लिए गांव में पानी का कोई श्रोत नहीं है। इनकी समस्या का समाधान जनप्रतिनिधि आज तक नहीं करा पाए। इसके साथ ही मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव है। बड़ी बात यह है कि करीब 20 किसानों ने पानी के लिए वन कर्मियों से भी संघर्ष कर लिया था और कई महीने की जेल भी काटी थी।
सरकार के द्वारा गांव को शहरी क्षेत्र की तर्ज पर विकसित करने की बात कही जाती है। लेकिन तेंदूखेड़ा का जरूआ गांव पूरी हकीकत बयां करता है, जो कि मुख्यालय से महज छह किमी दूर है। यहां न तो आवागमन के लिए कोई मार्ग है और नहीं पानी का कोई साधन। इस गांव की आबादी तीन सौ से अधिक है और यहां के लोग कई वर्षों से पानी के लिए बड़े श्रोत की मांग कर रहे हैं।लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई। आज नौबत यह आ गई कि इस गांव के आधे परिवार पलायन कर चुके हैं जो बचे हैं, वह परेशानियों का सामना कर रहे हैं।
पानी के लिए काटी जेल
अभी तक तो लोगों ने यह सुना था कि देश की आजादी के लिए लोगों ने जेल काटी, लेकिन तेंदूखेड़ा का जरूआ गांव यहां के लोगों ने पानी के लिए जेल यात्रा की। यहां वर्षों से जलसंकट बना हुआ है और ग्रामीण पानी की मांग करते हुए थक गए। नौ वर्ष पूर्व ग्रामीणों ने वन विभाग की उस जगह पर कब्जा कर लिया जहां पानी था, लेकिन यहां उन्हे सफलता नहीं मिली और वन विभाग और ग्रामीणों के बीच संघर्ष हो गया। तत्काल पुलिस बुलानी पड़ी और ग्रामीणों को खदेड़ते हुए वन भूमि को मुक्त कराते हुए करीब बीस लोगों को जेल भेज दिया गया, जो कई महीनों जेल में बंद रहे।
एक फसल के भरोसे किसान
जरूआ गांव में पानी का कोई ऐसा श्रोत नहीं है, जिससे ग्रामीणों को बारह महीने पानी मिल सके। बारिश के दिनों में पानी आसानी से मिल जाता है और ठंड तक खत्म हो जाता है। गर्मियों में पानी का एक श्राेत है, गांव की नदी जिसके पानी का लोग उपयोग करते हैं। बाकी यहां लगे हैंडपंप से पानी की जगह हवा निकलती है। किसानों ने बताया कि आधे गांव के लोग तो गर्मियों के पूर्व ही यहां से पलायन कर जाते हैं, जो बचते हैं उनको कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। जरूआ गांव में जल का कोई श्रोत नहीं है। इसलिए केवल धान की फसल ही यहां के किसान ले पाते हैं, वह भी यदि समय पर बारिश हो जाए, तब बाकी समय जमीन बंजर पड़ी रहती है।
आश्वासन मिला पर पानी नहीं
ग्राम जरूआ के ग्रामीणों ने बताया कि उनके गांव में पानी की भीषण समस्या है। हम लोगों ने इस समस्या के निराकरण के लिए विधायक, कलेक्टर और ब्लॉक के अधिकारियों को कई बार लिखित शिकायत की। लेकिन कोई निराकरण नहीं हुआ। दो बार हमारी ग्राम पंचायत इमलीडोल में कलेक्टर भी रात रूक चुके हैं, उन्होंने बड़े तालाब निर्माण का आश्वासन भी दिया था, लेकिन तालाब का निर्माण आज तक नहीं हुआ।
वर्तमान में गांव में दो हैंडपंप और एक नदी है। एक हैंडपंप बंद पड़ा है, दूसरे से पानी कम हवा ज्यादा निकलती है। ग्रामीणों के साथ मवेशियों का सहारा केवल नदी है, जिससे गुजारा होता है। ग्राम जरुआ में पानी की भीषण समस्या को लेकर तेंदूखेड़ा जनपद सीईओ मनीष बागरी ने बताया कि जरूआ गांव में पानी की समस्या का अभी कोई निराकरण नहीं हुआ है। यह पूरा गांव वन विभाग के अधीन है। मैंने दो हेक्टेयर भूमि की एनओसी के लिए वन विभाग में पत्राचार किया था, लेकिन वह नहीं मिली। कोशिश कर रहे हैं कि सतधारू योजना जरुआ में जो बंद पड़ी है, वह जल्दी से जल्दी चालू हो सके बड़े तालाब का कार्य जल संसाधन विभाग के अधीन होता है।