वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व में अन्य जानवरों के साथ बाघों की संख्या बढ़ती जा रही है, जिसे देखते हुए अब विभाग ने मवेशियों और कुत्तों का वैक्सीनेशन भी शुरू करवा दिया है। क्योंकि उनके अंदर भी कई प्रकार का संक्रमण रहता है और संपर्क में आने या शिकार करते समय बाघ व दूसरे जानवर प्रभावित न हो जाएं। इसको ध्यान में रखते हुए यह वैक्सीनेशन किया जा रहा है। यह जानवर अक्सर जंगली क्षेत्र में आते जाते हैं और जंगली जानवर के आसपास घूमते रहते हैं।
वीरागंना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व (नौरादेही) के डिप्टी डायरेक्टर डाॅ. एए अंसारी ने बताया कि जंगली जानवर जिनमें बाघ के अलावा जंगल के शाकाहारी प्राणी होते हैं। इनको टाइगर रिजर्व की सीमा से लगे गांव में रहने वाले कुत्तों और मवेशियों से बड़ा खतरा रहता है। बाघों को बफर जोन के कुत्ते से बड़ा खतरा होता है। इन कुत्तों से कैनाइन डिस्टेम्पर और पार्वो वायरस बीमारी बाघों में फैल सकती है। इसलिए हम बाघों को बचाने कुत्तों को टारगेट करते हैं।
वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व में भेड़िए भी बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। भेड़िए और कुत्ते एक ही प्रजाति कैनिस ल्यूपस की उप प्रजातियां हैं। इसलिए ज्यादा जरूरी है कि कुत्तों को वैक्सीनेशन के लिए हम टारगेट करें। कुत्तों के लिए कोर वैक्सीन आती है, जिसमें रैबीज, कैनाइन डिस्टेंपर, पार्वो वायरस, एडीनो वायरस और पैरा इन्फ्लुएंजा जैसी बीमारियों से बचाव होता है। इसका उपयोग हम वैक्सीनेशन में करते हैं।
वैक्सीन से हटेगा खतरा
टाइगर रिजर्व प्रबंधन मवेशियों और कुत्तों को वैक्सीन लगाने के लिए पशु चिकित्सा विभाग की मदद ले रहा है। तेंदूखेड़ा पशु चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर हरिकांत बिलबार ने बताया कि जंगली जानवर को मवेशियों ओर कुत्तों की बीमारियों से संक्रमण हो सकता है। क्योंकि ये दोनों जानवर कही भी आते जाते रहते हैं। इसलिए जंगली जानवरों को सुरक्षित रखने के लिए कुत्ते और मवेशियों में वीरांगना टाइगर रिजर्व प्रबंधन वैक्सीन लगवा रहा है। उन गांव के मवेशियों में वैक्सीन का कार्य चल रहा है। जो टाइगर रिजर्व से लगे हुए हैं। मवेशियों में तीन बड़ी बीमारी होती है, जिनमें खुरपका, मुंह पका, गलघोंटू और चुरका रोग का टीकाकरण किया जा रहा है। इसी तरह गांव के पालतू एवं निराश्रित कुत्तों में कैनाइन डिस्टेंपर बीमारी एवं रेबीज़ बीमारी के टीकाकरण पर प्रक्रिया चल रही है।
वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर डाक्टर अब्दुल अंसारी ने बताया कि बाघों के साथ-साथ हमारे शाकाहारी जानवरों को बचाने के लिए हम लोग रिंग वैक्सीनेशन की रणनीति अपनाते हैं। इसलिए बफर जोन से लगे इलाके को एक रिंग की तरह चिन्हित करते हैं और फिर वैक्शीनेशन शुरू करते हैं। सामान्य तौर पर संरक्षित वन क्षेत्र टाइगर रिजर्व या वाइल्ड लाइफ सेंचुरी को हम लोग प्राथमिकता पर लेते हैं। इसमें पशु चिकित्सक विभाग की मदद मिलती है। जैसे हमारा टाइगर रिजर्व तीन जिलों में फैला हुआ है। 17 जनवरी को बैठक में तय किया हमने 24 हजार वैक्सीन डोज खरीदे हैं।