दमोह के तेंदूखेड़ा ब्लाक में सर्वे करती टीम
दमोह के लोगों के लिए खुशखबरी है। यहां के तेंदूखेड़ा ब्लाक से कर्क रेखा निकलने की पुष्टि हो गई है। दिल्ली से आई टीम ने यहां सर्वे किया है। अब कर्क रेखा के गुजरने वाली जगहों पर पीली लाइन डाली जाएगी। साथ ही एक बोर्ड लगाया जाएगा, जिससे इसकी अच्छे से पहचान हो सके।
दमोह कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर ने कुछ दिन पहले भारतीय सर्वेक्षण विभाग को लेटर लिखा था। लेटर में इलाके का कर्क रेखा को लेकर सर्वें करने की मांग की थी। कलेक्टर द्वारा भेजे गए पत्र के बाद गुरुवार को दिल्ली से टीम यहां पहुंची और तेंदूखेड़ा से कर्क रेखा गुजरने की पुस्टि की।
क्या है कर्क रेखा का महत्व ?
यह रेखा पृथ्वी पर उन पांच प्रमुख अक्षांश रेखाओं में से एक है, जो ग्लोब पर दिखती है। कर्क रेखा पृथ्वी की उत्तरी अक्षांश रेखा हैं। इस पर जून माह में सूर्य, दोपहर के समय लम्बवत चमकता है। ये घटना तब होती है, जब उत्तरी गोलार्ध सूर्य के समकक्ष अत्यधिक झुक जाता है। कर्क रेखा पर सूर्य की सीधी किरणें पड़ने के कारण भारत के दक्षिणी हिस्से में उच्च दबाव बनता है। इससे हवाएं उच्च दबाव से कम दबाव की ओर बहती हैं। हवाएं अपने साथ बादलों को भी ले आती हैं। ये बादल ही पूरे भारत में वर्षा करते हैं। इसी वजह से मानसून का मौसम आता है।
इन जगहों पर मिली कर्क रेखा
भारत सरकार की सर्वेंक्षण टीम को तेंदूखेड़ा दमोह मार्ग पर बसे पिंडराई गांव में कर्क रेखा मिली। टीम ने झलोन मार्ग पर भी सर्वे किया तो बगदरी के पास भी कर्क रेखा मिली है।
भारतीय सर्वेक्षण टीम में शामिल जयप्रकाश पाटीदार ने बताया कि सर्वे में बगदरी गांव से निकलने वाली कर्क रेखा को चिन्हित किया गया है। दमोह कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर ने बताया कि दमोह जिला पर्यटन और पुरातत्व के हिसाब से बहुत समृद्ध है। पिंडराई और बगदरी में कर्क रेखा को चिन्हित करने से यहां पर पर्यटन बढ़ने की उम्मीद है। शनिवार तक सर्वे टीम का काम पूरा हो जाएगा। कर्क रेखा की जगहों पर पीली पट्टी भी डाली जाएगी।