दमोह जिला इस समय डेंगू का हॉट स्पॉट बन गया है। जिले में एक अगस्त 2023 से लेकर अब तक डेंगू के 216 मरीज मिल चुके हैं। जबकि जिले की निजी अस्पतालों में रोजाना पांच से 10 डेंगू के मरीज पहुंच रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग और निजी अस्पतालों के बीच तालमेल नहीं होने के कारण डेंगू के मरीजों की सही जानकारी विभाग तक नहीं पहुंच रही है। इसके चलते जिले में डेंगू का खतरा बढ़ता जा रहा है।
पेट दर्द होना
सिर दर्द होना
उल्टी होना
नाक से खून बहना
उल्टी, पेशाब या मल में खून आना
हडि्डयों और जोड़ों में दर्द होना
तेज बुखार आना
थकावट होना
सांस लेने में परेशानी होना
प्लेटलेट्स काउंट कम होना
बचाव में रखें ये सावधानियां
मच्छरदानी का उपयोग करें
घर के आसपास पानी जमा न होने दें
कूलर का पानी बदलते रहें
पूरे बाजू के कपड़े पहनें
मच्छर से बचने वाले रिप्लेटका प्रयोग करें
पेड़ पौधों के पास जाएं या घर के बाहर निकले तो शरीर को ढकें
झोलाछाप डॉक्टर से इलाज न कराएं, अच्छे डॉक्टर से जांच कराएं
नगर पालिका नहीं करा रही फागिंग
डेंगू के बढ़ते प्रकोप को रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग निष्क्रिय नजर आ रहा है। वहीं, मच्छरों की रोकथाम को लेकर नगर पालिका द्वारा भी किसी भी प्रकार के प्रयास नहीं किये जा रहे हैं और न ही शहर के वार्डों में जाकर रात के समय फागिंग कर रहे हैं। नगर पालिका परिषद में सीएमओ के न रहने के चलते एसडीएम को प्रभार सौंपा गया है, लेकिन एसडीएम द्वारा निर्वाचन कार्य में व्यस्तता के चलते उनके पास दिए गए प्रभार वाले विभागों की ओर किसी भी प्रकार का ध्यान नहीं होने के चलते नगर पालिका निष्क्रिय हो गई है। यही कारण है कि दमोह शहर में डेंगू के मरीजों की संख्या लगातार ही बढ़ रही है।