दमोह जिले के तेंदूखेड़ा ब्लॉक में स्थित सेहरी सहित कई गांवों में जमीन की रजिस्ट्री पर पटवारी और रजिस्ट्रार ने रोक लगा दी है, जिससे किसानों और ग्रामीणों में भारी असमंजस और परेशानी का माहौल है। इन अधिकारियों का कहना है कि यह गांव वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में आते हैं, जबकि सेहरी गांव बफर जोन में है, जहां किसी प्रकार का प्रतिबंध नहीं है।
सेहरी गांव का मामला
वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व की घोषणा एक साल पहले की गई थी, जिसके बाद इसे तीन भागों में बांटा गया: कोर एरिया, संवेदनशील एरिया और बफर जोन। सेहरी गांव को बफर जोन में रखा गया है, जहां जमीन की खरीद-बिक्री पर कोई प्रतिबंध नहीं है। लेकिन पटवारी और रजिस्ट्रार ने इसके बावजूद जमीन की रजिस्ट्री पर रोक लगा दी है, जिससे ग्रामीण परेशान हैं। रजिस्ट्रार और पटवारी यह बताने में असमर्थ हैं कि किस नियम के तहत यह रोक लगाई गई है।
ग्रामीणों की परेशानी
सेहरी गांव के कई लोग, जैसे रिटायर्ड रेंजर लखन यादव, जिन्होंने 25 लाख रुपये में जमीन खरीदी थी, अब इस रोक के कारण अपनी जमीन की रजिस्ट्री नहीं करवा पा रहे हैं। यादव ने बताया कि उन्होंने अपनी सारी राशि चुका दी है, लेकिन रजिस्ट्री प्रक्रिया में बाधा आ रही है, जिससे वे और अन्य ग्रामीण बेहद परेशान हैं।
पत्र का हवाला
वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर ने 5 अगस्त को एक पत्र जारी किया था, जिसमें कोर एरिया में आने वाले गांवों की जमीन की खरीद-बिक्री पर रोक लगाने की बात कही गई थी। लेकिन तेंदूखेड़ा के पटवारियों ने बफर जोन के गांवों पर भी यह रोक लागू कर दी है, जबकि इस क्षेत्र पर कोई प्रतिबंध नहीं है। टाइगर रिजर्व के रेंजर नीरज बिसेन ने स्पष्ट किया कि बफर जोन में जमीन की खरीद-बिक्री पर कोई रोक नहीं है और सेहरी गांव में रजिस्ट्री की जा सकती है।