दमोह जिले के भदौली गांव में विराजमान देवी प्रतिमा का विसर्जन गांव के लोग प्रयागराज गंगा नदी में जाकर करते हैं। यह अनूठी परंपरा 17 साल से अनवरत जारी है। 2007 से शुरू हुआ यह क्रम आज भी जारी है। हर साल दशहरा के अगले दिन गांव के कुछ लोग देवी मां की प्रतिमा को दमोह से ट्रेन में प्रयागराज ले जाकर पूरे विधि-विधान से उनका विसर्जन करते हैं। बीच में कोरोना काल के दो साल ग्रामीण प्रतिमा को प्रयागराज नहीं ले जा पाए थे। इसलिए कुम्हारी के पास व्यारमा नदी में देवी मां की प्रतिमा का विसर्जन किया गया था।
आयोजक समिति में शामिल कृपाल सिंह राजपूत ने बताया कि जिले भर में ग्रामीण क्षेत्रों में देवी मां की प्रतिमा की स्थापना धूमधाम से की जाती है। इसी विचार को ध्यान में रखते हुए हम सभी ग्रामीणों ने अपने गांव में देवी मां की प्रतिमा की स्थापना 2006 में शुरू की। पहले साल गांव के पास ही एक कुंड में मां की प्रतिमा को विसर्जित किया गया, लेकिन अगले साल यह तय किया कि अब से प्रतिमा का विसर्जन गंगा नदी में किया जाएगा और इसके लिए हम सभी ने प्रयागराज क्षेत्र को चुना। 2007 से लगातार गांव के सभी लोग देवी मां की आराधना करते हैं और प्रतिमा का विसर्जन प्रयागराज में करते हैं। इस बार भी हम सभी लोग रविवार की सुबह प्रतिमा को लेकर प्रयागराज के लिए निकले।
गांव के युवा सोनू राजपूत ने बताया कि मेरे पिता और गांव के कुछ लोग प्रतिमा लेकर प्रयागराज के लिए ट्रेन से जा रहे हैं। रात तक वहां पहुंच जाएंगे और अगले दिन सोमवार को विधि-विधान से देवी मां की प्रतिमा का विसर्जन किया जाएगा। दमोह रेलवे स्टेशन पर भी लोगों ने देवी प्रतिमा के दर्शन किए।