दमोह नगरपालिका में शहर से लगी 9 ग्राम पंचायतों के 12 गांव शामिल होने हैं, लेकिन यह प्रक्रिया अटकी हुई है। इसका राजपत्र एक साल पहले जारी हो चुका है, लेकिन प्रक्रिया आगे बढ़ने में अभी भी कई पेंच हैं। अभी तक नगरपालिका की सीमाओं का सीमांकन नहीं हो पाया है और शामिल होने वाली नई ग्राम पंचायतों की परिसंपत्तियों की सूची नगरपालिका को नहीं मिली है। ऐसे में सीमांकन की प्रक्रिया में अभी दो से ढाई साल का समय और लग सकता है।
नगरपालिका अधिकारियों का कहना है कि उनके पास सीमांकन कराने के लिए अमला नहीं है। अब यह काम टेंडर प्रक्रिया से कराया जाएगा। इधर, जनपद पंचायत सरपंचों का बचा दो से ढाई साल का कार्यकाल पूरा होने का इंतजार कर रही है, क्योंकि कार्यकाल से पहले हैंडओवर करने की प्रक्रिया अपनाने पर मामला कोर्ट में जाने का डर है। इससे पहले जबलपुर और पटेरा नगर परिषद में इस तरह की प्रक्रिया अपनाने पर मामला फंस चुका है।
राजपत्र में शामिल ग्राम पंचायतें
11 मार्च 2024 को जारी राजपत्र में उन पंचायतों का उल्लेख किया गया है, जिन्हें शहरी सीमा में शामिल किया जाना है। इनमें शामिल हैं...
- ग्राम पंचायत इमलाई
- ग्राम पंचायत आमचौपरा का चौपराखुर्द और चौपरा रैयतवारी
- ग्राम हिरदेपुर
- ग्राम पंचायत मारूताल
- कोटा तला रैयतवारी
- लाडनबाग
- ग्राम पंचायत मराहार का राजनगर खुर्द
- ग्राम पंचायत समन्ना का समन्ना माल, लिधोरा और समन्ना रैयतवारी
- ग्राम पंचायत सिंगपुर
- ग्राम पंचायत कुंअरपुर
- ग्राम पंचायत पिपरिया नायक
ये सभी गांव शहर से 3 से 4 किमी दूरी पर स्थित हैं। इनमें परिसंपत्तियों, देनदारी और संसाधनों की सूची तैयार की जा रही है, जिसे नगर पालिका को सौंपा जाएगा। लेकिन कार्यकाल पूरा न होने की वजह से काम रुका हुआ है। जनपद सीईओ पूनम दुबे ने बताया कि परिसंपत्तियों की जानकारी आ गई है और उसकी लिस्टिंग का काम चल रहा है। लेकिन अभी इसे नगर पालिका को हैंडओवर नहीं किया जाएगा, क्योंकि सरपंचों का कार्यकाल पूरा नहीं हुआ है। इस मामले में जबलपुर से मार्गदर्शन मांगा गया है, जहां से भी कार्यकाल पूरा होने तक इंतजार करने की बात कही गई है।
एजेंसी से कराया जाएगा सीमांकन
परिसीमन के बाद नगर पालिका का क्षेत्रफल बढ़ जाएगा। इसके लिए नए सिरे से परिसीमन करना होगा। सामान्यतः परिसीमन का कार्य नगर पालिका का राजस्व अमला करता है, लेकिन यहां स्टाफ की कमी के कारण यह कार्य अब निजी एजेंसी से कराया जाएगा। इसके लिए टेंडर तैयार किया जा रहा है, जो दो से ढाई साल में पूरा होगा। सीएमओ प्रदीप कुमार शर्मा ने बताया कि हैंडओवर करने से पहले सीमाएं तय की जाएंगी। यह प्रक्रिया टेंडर के माध्यम से होगी, जिसमें दो से ढाई साल का समय लगेगा। अभी जनपद पंचायत से परिसंपत्तियों की कोई जानकारी नहीं मिली है।
दो बार हुआ परिसीमन
दमोह नगरपालिका का परिसीमन दो बार हो चुका है। पहली बार 1983 में और दूसरी बार 1994 में परिसीमन किया गया। दूसरी बार में 1.25 लाख आबादी के हिसाब से शहर बी कैटेगरी में आ गया था। लेकिन, अब आबादी 1.5 लाख से ज्यादा हो गई है, लेकिन यह अभी तक ए कैटेगरी में नहीं आ पाया है, जबकि जनसंख्या इससे कहीं ज्यादा हो चुकी है।
दो साल में पूरी होगी प्रक्रिया
कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर का कहना है कि परिसीमन की प्रक्रिया चल रही है। परिसंपत्तियों की जानकारी जुटाई जा रही है। नगरपालिका और जनपद पंचायत के बीच समन्वय से काम किया जा रहा है। दो साल में पूरी प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।