कुएं से निकालकर जंगल में छोड़ी गई बाघिन
दमोह जिले के वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व के नौरादेही अभ्यारण्य को एक नई बाघिन की सौगात मिली है। मंगलवार रात पेंच टाइगर रिजर्व से रेस्क्यू कर लाई गई इस बाघिन को सुरक्षित जंगल में छोड़ दिया गया। इससे पहले मंगलवार सुबह, यह बाघिन पेंच टाइगर रिजर्व के खबासा बफर परिक्षेत्र में एक किसान के कुएं में गिर गई थी। वह जंगली सूअर का शिकार कर रही थी, लेकिन भागते समय सूअर सहित कुएं में जा गिरी। ग्रामीणों ने दोनों को कुएं में संघर्ष करते देखा और वन विभाग को सूचना दी।
चार घंटे चला रेस्क्यू अभियान
वन विभाग की टीम ने चार घंटे की मशक्कत के बाद बाघिन और जंगली सूअर को सुरक्षित बाहर निकाला। दिलचस्प बात यह रही कि बाघिन ने पानी में रहते हुए भी सूअर का शिकार नहीं किया। कई घंटों तक दोनों कुएं में एक-दूसरे के साथ रहे। रेस्क्यू टीम ने सावधानीपूर्वक दोनों को बाहर निकाला, जहां बाघिन को वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व के नौरादेही जंगल में भेजा गया, जबकि जंगली सूअर को पास के ही जंगल में छोड़ दिया गया।
नौरादेही में बढ़ी बाघों की संख्या
नौरादेही अभ्यारण्य में पहले से 20 से अधिक बाघ मौजूद हैं। नई बाघिन के आगमन से यहां बाघों की संख्या में वृद्धि हुई है। यह टाइगर रिजर्व मध्य प्रदेश के वन्यजीव संरक्षण प्रयासों का अहम हिस्सा है और बाघों के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करता है।
अधिकारियों की प्रतिक्रिया
पेंच टाइगर रिजर्व के उपसंचालक रजनीश कुमार ने बताया कि बाघिन करीब तीन वर्ष की है और उसे पूरी सुरक्षा के साथ नौरादेही में छोड़ा गया है। वहीं, नौरादेही के प्रभारी उपवन मंडल अधिकारी प्रतीक दुबे ने कहा कि बाघिन को कहां छोड़ा गया है, इसकी जानकारी जल्द दी जाएगी, लेकिन यह अभ्यारण्य के लिए एक महत्वपूर्ण सौगात है। इस घटनाक्रम से नौरादेही अभ्यारण्य में वन्यजीव संरक्षण को नई मजबूती मिली है। बाघों की संख्या में वृद्धि से न केवल जैव विविधता बढ़ेगी, बल्कि यह क्षेत्र पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में भी सहायक होगा।
कुएं से निकालकर जंगल में छोड़ी गई बाघिन