दमोह जिले की जबेरा विधानसभा के सिंग्रामपुर में शनिवार पांच अक्टूबर को कैबिनेट बैठक होने वाली है। इसमें दमोह जिले को एयर टैक्सी की सौगात मिलने की संभावना है। यदि ऐसा हुआ तो जिले के लोगों के लिए यह बड़ा तोहफा हो सकता है। यह इसलिए भी संभव हो सकता है, क्योंकि दमोह जिले से दो राज्यमंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी और लखन पटेल के अलावा दमोह के पूर्व सांसद और वर्तमान में कैबिनेट मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल भी दमोह की जर्जर हवाई पट्टी की मरम्मत कर उसे आवागमन के लिए बनाने का समर्थन कर रहे हैं।
गुरुवार को कैबिनेट बैठक की तैयारी का जायजा लेने तीनों मंत्री सिंग्रामपुर पहुंचे तो उन्होंने सीतानगर गांव में बनी हवाई पट्टी को दुरुस्त कर एयर टैक्सी सुविधा बहाल करने पर अपनी बात मीडिया के सामने रखी। इन तीनों मंत्रियों ने इस बात पर अपनी सहमति जताई है कि वह कैबिनेट की बैठक के दौरान मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव से दमोह जिले के लिए यह सौगात मांगेंगे।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि हवाई पट्टी दमोह में है यदि उसकी मरम्मत होगी तो उपयोग भी हो सकता है। पथरिया विधानसभा से विधायक और प्रदेश के पशुपालन राज्य मंत्री लखन पटेल ने कहा कि नरसिंहगढ़ स्थित मायसेम सीमेंट फैक्ट्री ने राजस्व विभाग से लीज पर जमीन लेकर इस हवाई पट्टी का निर्माण कई साल पहले करवाया था। उनकी लीज समाप्त हो चुकी हो और जमीन वापस राजस्व विभाग के पास पहुंच गई है। वहां पर काफी स्ट्रक्चर अभी भी बना है, केवल हवाई पट्टी की यदि मरम्मत कर दी जाए तो यहां पर विमान का आवागमन शुरू हो सकता है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की मंशा भी है कि प्रत्येक जिले को एयर कनेक्टिविटी से जोड़ा जाए और इसलिए दमोह के लिए यहां काफी संभावनाएं दिख रही हैं। लखन पटेल ने कहा कि वह अपने साथी मंत्री धर्मेंद्र सिंह और वरिष्ठ मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल के माध्यम से कैबिनेट में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने यह बात रखेंगे और उन्हें पूरा भरोसा है कि इस कैबिनेट की बैठक में दमोह को यह सौगात मिल जाएगी।
एक बार ही उतारा गया प्लेन
दमोह जिला मुख्यालय से करीब 25 किलोमीटर दूर पथरिया विधानसभा के नरसिंहगढ़ के पास सीतानगर गांव में बनी इस हवाई पट्टी का निर्माण करीब 50 साल पहले हुआ था। जिस पर एक बार ही मिनी प्लेन उतारा गया। इस हवाई पट्टी का निर्माण मायसम सीमेंट फैक्ट्री ने कराया था। सीमेंट कंपनी के पुराने कर्मचारी इब्राहिम खान बताते हैं कि कंपनी के पहले मालिक बिरला मिनी प्लेन से वर्ष 1998,99 ने यहां आए थे और उनके लिए ही हवाई पट्टी बनाई गई थी। उसके बाद इस हवाई पट्टी का उपयोग कभी नहीं हुआ।