दमोह जिले के देहात थाना क्षेत्र के ग्राम खैजराकलां गांव में गुरुवार को पुलिस सुरक्षा में दलित दूल्हे की रछवाई निकाली गई। इस दौरान गांव में तब तक पुलिस मौजूद रही जब तक गांव में रछवाई घूमती रही। पिता ने पुलिस में आवेदन देकर सुरक्षा की मांग की थी।
बता दें बुंदेलखंड के ग्रामीण इलाकों में रूढ़िवादी विचारधारा अभी भी पैर पसारे हुए हैं। ऐसे मामले तब सामने आ रहे हैं, जो आधुनिकता के इस दौर में आमजन की समझ से परे हैं। ताजा मामला देहात थाना क्षेत्र के ग्राम खैजराकलां गांव से सामने आया है। यहां गुरुवार को पुलिस सुरक्षा में दलित दूल्हे प्रताप अहिरवार की रछवाई संपन्न हुई। जातिगत भेदभाव और रूढ़ियों के चलते प्रताप को घोड़ी पर चढ़कर रछवाई निकालने के लिए प्रशासन से सुरक्षा की मांग करनी पड़ी। पुलिस प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए गांव में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच रछवाई निकलवाई।
पुलिस सुरक्षा में घोड़ी पर सवार हुआ दूल्हा
गांव में जातिगत भेदभाव के कारण अनुसूचित जाति के लोग घोड़ी पर रछवाई नहीं निकाल पाते थे। प्रताप अहिरवार ने इस परंपरा को तोड़ने के लिए प्रशासन से मदद मांगी और एसडीएम को पत्र लिखकर सुरक्षा की मांग की। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर गुरुवार सुबह 11 बजे देहात थाना पुलिस गांव पहुंची। दोपहर 12 बजे प्रताप घोड़ी पर सवार हुआ और पुलिस की सुरक्षा में पूरे गांव में रछवाई निकाली गई। पूरी रस्म शांतिपूर्वक तरीके से संपन्न हुई।
गांव में पहली बार हुई रछवाई
खैजराकलां में यह पहला मामला है जब किसी दलित दूल्हे की रछवाई पुलिस सुरक्षा में कराई गई। प्रशासन का कहना है कि भविष्य में भी किसी के साथ भेदभाव नहीं होने दिया जाएगा और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे। बता दें कि दूल्हे को पुलिस सुरक्षा की आवश्यकता इसलिए बनी, क्योंकि इससे पहले अनुसूचित जाति का कोई दूल्हा घोड़ी पर सवार हुआ, तो उसके साथ मारपीट की घटनाएं हो चुकीं थीं। इसके पहले पथरिया और तेजगढ़ क्षेत्र में भी इस प्रकार के मामले सामने आ चुके हैं।