दमोह के फुटेरा तालाब पर दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान बैरिकेडिंग को लेकर सीएमओ राजेंद्र सिंह लोधी और दुर्गोत्सव समिति के सदस्यों में विवाद हो गया। हंगामे के कारण विसर्जन डेढ़ घंटे रुका। पुलिस की समझाइश के बाद प्रक्रिया शुरू हुई।
विजयादशमी के अवसर पर मंगलवार को दमोह के फुटेरा तालाब पर दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन के दौरान विवाद हो गया। रेलवे स्टेशन दुर्गोत्सव समिति के सदस्यों और नगर पालिका के सीएमओ राजेंद्र सिंह लोधी के बीच बैरिकेडिंग को लेकर कहासुनी हो गई। देखते ही देखते विवाद बढ़ गया और प्रतिमा विसर्जन की प्रक्रिया करीब डेढ़ घंटे तक प्रभावित रही।
समिति के सदस्यों ने सीएमओ पर अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगाते हुए उनसे माफी मांगने की मांग की। वहीं, सीएमओ की ओर से भी सदस्यों पर दबाव बनाने और धमकाने के आरोप लगाए गए। इस दौरान सीएमओ के खिलाफ नारेबाजी भी हुई। घटनाक्रम के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विवाद को लेकर बहस शुरू हो गई।
बैरिकेडिंग हटाने को लेकर शुरू हुआ विवाद
जानकारी के अनुसार, मंगलवार शाम नगर पालिका परिसर में स्थापित देवी प्रतिमा विसर्जन के लिए फुटेरा तालाब पहुंची थी। इसी दौरान भाजपा के पूर्व जिला महामंत्री सतीश तिवारी और नगर पालिका सीएमओ राजेंद्र सिंह लोधी के बीच बैरिकेडिंग को लेकर विवाद हो गया।
सतीश तिवारी का आरोप था कि घाट पर लगाए गए बैरिकेड हटाने के बावजूद सीएमओ ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया। इस पर विसर्जन के लिए पहुंचे लोगों ने नाराजगी जताई और सीएमओ से माफी मांगने की मांग करने लगे।
वहीं, सीएमओ का कहना था कि तालाब पर बैरिकेडिंग कलेक्टर के निर्देश पर की गई थी। इसी व्यवस्था को लेकर दोनों पक्षों के बीच बहस बढ़ गई। विवाद के चलते प्रतिमा विसर्जन रोकना पड़ा और मौके पर काफी देर तक हंगामा होता रहा।
इसके बाद विवाद ने सामाजिक रंग ले लिया। सोशल मीडिया पर ओबीसी वर्ग से जुड़े कुछ लोगों ने नाराजगी जताते हुए दुर्गोत्सव समिति के सदस्यों पर सीएमओ के साथ मारपीट करने और उन पर जबरन माफी मांगने का दबाव बनाने के आरोप लगाए। हालांकि, वायरल वीडियो और सोशल मीडिया पर लगाए जा रहे आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में दोनों पक्षों के आरोपों को अलग-अलग देखा जाना जरूरी है।
सीएसपी ने मौके पर पहुंचकर कराया विवाद शांत
विवाद बढ़ने की सूचना मिलने पर सीएसपी एचआर पांडे मौके पर पहुंचे। उन्होंने दोनों पक्षों को समझाइश देकर स्थिति सामान्य कराने का प्रयास किया। इसके बाद क्रेन की मदद से देवी प्रतिमा का विसर्जन कराया गया। करीब डेढ़ घंटे तक प्रभावित रही प्रक्रिया दोबारा शुरू होने के बाद अन्य समितियों की प्रतिमाएं भी तालाब तक पहुंचने लगीं। विसर्जन स्थल पर श्रद्धालुओं की मौजूदगी और चल समारोह की व्यवस्थाओं को देखते हुए पुलिस प्रशासन सक्रिय रहा। अधिकारियों की समझाइश के बाद स्थिति शांत हुई और प्रतिमा विसर्जन का क्रम आगे बढ़ा।
घंटाघर पर अखाड़ों ने दिखाए करतब, झांकियों को मिले पुरस्कार
विवाद के बीच शहर में दशहरा चल समारोह भी जारी रहा। विभिन्न क्षेत्रों की दुर्गा प्रतिमाएं चल समारोह में शामिल हुईं। अखाड़ों का संचालन करने वाली समितियां घंटाघर पहुंचीं। यहां से टॉकीज चौराहा होते हुए प्रतिमाओं को फुटेरा तालाब ले जाया गया।
घंटाघर पर विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में अखाड़ों के कलाकारों ने अपने करतब दिखाए। इस दौरान झांकियां भी आकर्षण का केंद्र रहीं। बेहतर प्रदर्शन करने वाली झांकियों को पुरस्कार प्रदान किए गए। श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच चल समारोह में धार्मिक उत्साह दिखाई दिया।
रातभर चला विसर्जन, सुबह सात बजे विसर्जित हुई अंतिम प्रतिमा
फुटेरा तालाब पर प्रतिमाओं का विसर्जन व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की तैनाती की गई थी। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुजीत सिंह भदौरिया, सीएसपी एचआर पांडे, तहसीलदार रघुनंदन चतुर्वेदी, कोतवाली टीआई मनीष कुमार और एसडीआरएफ टीम प्रभारी प्राची दुबे सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारी व्यवस्थाओं में जुटे रहे। रातभर फुटेरा तालाब पर प्रतिमाओं के विसर्जन का सिलसिला चलता रहा। बुधवार सुबह करीब सात बजे महाकाली की अंतिम प्रतिमा का विसर्जन होने के साथ दशहरा चल समारोह का समापन हुआ। इस दौरान अधिकारियों और पुलिसकर्मियों ने व्यवस्थाओं की निगरानी की।
कपिल सोनी ने प्रशासन, पुलिस और नगर पालिका की व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि चल समारोह शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। हालांकि, फुटेरा तालाब पर बैरिकेडिंग को लेकर हुआ विवाद दशहरा आयोजन के दौरान चर्चा का प्रमुख विषय बना रहा। वायरल वीडियो और दोनों पक्षों की ओर से लगाए गए आरोपों के कारण इस घटनाक्रम को लेकर सोशल मीडिया पर बहस जारी है।