दमोह जिले की देवरान ग्राम पंचायत की महिला सरपंच संगीता सिंह का निर्वाचन फर्जी जाति प्रमाण पत्र के चलते शून्य घोषित कर दिया गया है। यह फैसला पथरिया एसडीएम निकेत चौरसिया ने पंचायत निर्वाचन नियम 1995 की धारा 21 के तहत सुनाया है। अब इस पद पर उपचुनाव की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और याचिकाकर्ता संगीता सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी में हैं।
जाति प्रमाण पत्र को लेकर शुरू से था विवाद
देवरान ग्राम पंचायत का सरपंच पद महिला पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित था। इसी आधार पर संगीता सिंह इस पद पर निर्वाचित हुई थीं। लेकिन चुनाव परिणाम के तुरंत बाद ही प्रतिद्वंदी बबली पति दीपेंद्र ने आपत्ति दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि संगीता सिंह सामान्य वर्ग की हैं और उन्होंने फर्जी जाति प्रमाण पत्र के बल पर चुनाव लड़ा। शिकायत के आधार पर शुरू हुई जांच में संगीता सिंह को 14 दिनों की अवधि में वैध पिछड़ा वर्ग प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया, लेकिन वे प्रमाण देने में असफल रहीं।
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भाई ने भी नहीं किया दावे का समर्थन
जांच में यह भी सामने आया कि संगीता सिंह छतरपुर जिले के डोंगरपुर गांव की मूल निवासी हैं। मामले की गंभीरता तब और बढ़ गई जब उनके सगे भाई भानुप्रताप ने स्वीकार किया कि न तो उन्हें और न ही उनके बच्चों को कभी भी पिछड़ा वर्ग की छात्रवृत्ति या कोई जातिगत प्रमाण पत्र मिला है।
इन तमाम तथ्यों के आधार पर एसडीएम पथरिया ने संगीता सिंह का निर्वाचन शून्य घोषित कर दिया। जनपद पंचायत के सीईओ केके पांडे ने जानकारी दी कि अब देवरान पंचायत के सरपंच पद के लिए उपचुनाव की प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है।
एफआईआर की तैयारी में याचिकाकर्ता
फैसले के बाद याचिकाकर्ता बबली ने कहा है कि वह संगीता सिंह के खिलाफ धोखाधड़ी की एफआईआर दर्ज कराएंगी। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया से धोखा करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
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प्रदेश का पहला पेपरलेस चुनाव हुआ संपन्न
उधर, हटा ब्लॉक के गैसाबाद जनपद सदस्य के लिए 22 जुलाई को हुए उपचुनाव में 60 प्रतिशत से अधिक मतदान दर्ज किया गया। यह चुनाव प्रदेश का पहला पेपरलेस उपचुनाव रहा। अब 26 जुलाई को इसकी मतगणना होगी, जिसमें यह तय होगा कि पांच प्रत्याशियों में से किसे जनता ने सबसे अधिक समर्थन दिया है।