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मध्यप्रदेश के राज्यपाल से हत्या के आरोपी मंत्री लाल सिंह आर्य को बर्खास्त करने की मांग

Wed, 06 Dec 2017 01:21 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला
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लाल सिंह आर्य
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कांग्रेस ने मध्यप्रदेश के राज्यपाल ओ.पी. कोहली से हत्या के आरोपी राज्यमंत्री लाल सिंह आर्य को बर्खास्त करने की मांग की है। भिंड में सीबीआई की विशेष अदालत ने मंगलवार को कांग्रेस विधायक माखनलाल जाटव की अप्रैल 2009 में हुई हत्या के सह-आरोपी और मध्यप्रदेश सरकार में सामान्य प्रशासन एवं आदिम जाति कल्याण राज्यमंत्री लाल सिंह आर्य के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया। कोर्ट के 6 बार जमानती वारंट जारी करने पर भी आर्य के पेश नहीं होने पर 7वीं बार गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया। 
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यह भी पढ़ें: विधायक माखनलाल जाटव हत्याकांड: मंत्री लाल सिंह आर्य के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी 

मध्यप्रदेश के भिंड की विशेष सीबीआई कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस ने बताया कि वह कोर्ट द्वारा 6 बार जारी की गई जामनती वारंट की तामिली नहीं करा पाई, जिसके बाद कोर्ट ने मध्यप्रदेश में राज्यमंत्री लाल सिंह आर्य की गिरफ्तारी का वारंट जारी किया। आरोपी मंत्री आर्य के पास अब ज्यादा विकल्प नहीं बचे हैं। 14 नवंबर को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर पीठ ने आर्य की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। हाईकोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा था, 'अदालत के विचार में मौजूद साक्ष्य पर्याप्त रूप से गहरे संदेह के दायरे में आते हैं।' 

कांग्रेस ने राज्यपाल ओ.पी. कोहली से मिलकर आरोपी मंत्री लाल सिंह आर्य को मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने की अपील की है। नेता विपक्ष अजय सिंह ने कहा, 'कोर्ट ने 6 बार वारंट जारी किया लेकिन मुख्यमंत्री मामले को लगातार नजरअंदाज किया है। अब जब कोर्ट ने मंत्री के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया है, आर्य को पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है। अगर मुख्यमंत्री कोई कार्रवाई नहीं करते हैं तो राज्यपाल को आर्य को बर्खास्त कर देना चाहिए।" 
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'मुख्यमंत्री कोर्ट के आदेशों का अनादर क्यों कर रहे हैं?'

माखन लाल जाटव (बाएं) और लाल सिंह आर्या (दाएं)
लाल सिंह आर्य ने इससे पहले भिंड की विशेष अदालत में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी जो खारिज हो गई थी और हाईकोर्ट में दायर अपील खारिज कर दी गई। दिलचस्प बात ये है कि इसी साल 27 अप्रैल को सीबीआई ने आर्य को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया था। लेकिन जाटव के परिजनों के वकील ने एक याचिका दायर और आर्य को आरोपी बनाए जाने की मांग की। मामले में बहस की सुनवाई पूरी होने पर विशेष न्यायधीश ने आर्य का नाम आरोपियों में शामिल किया। 

राज्य कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता के.के.मिश्रा ने राज्य सरकार पर आरोप लगाया कि वह कोर्ट द्वारा लगातार जारी किए जा रहे वारंट की अनदेखी कर रही है। उन्होंने कहा, 'अगर विधायिका खुद को न्यायपालिका से उपर साबित करेगी, तो ये सिर्फ गलत ही नहीं बल्कि लोकतंत्र के लिए भी खतरनाक है।' मिश्रा ने याद दिलाया कि जब पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को 2016 में एक 'राजनीतिक मामले' में सम्मन मिला तो वे भोपाल अदालत के सामने पेश होने के लिए उज्जैन से भोपाल तुरंत पहुंचे थे। मिश्रा ने सवाल किया, 'बीजेपी हत्या के आरोपी एक मंत्री को लगातार संरक्षण दे रही है और कोर्ट के वारंट की लगातार अनदेखी कर रही है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान कोर्ट के आदेशों का अनादर क्यों कर रहे हैं?' 

यह भी पढ़ें: मध्यप्रदेश: मुख्यमंत्री की कुर्सी पर 12 साल पूरे, बीजेपी के जश्न का NCRB की रिपोर्ट ने जायका बिगाड़ा

गौरतलब है कि करीब आठ साल पहले गोहद विधायक माखनलाल जाटव की हत्या अप्रैल 2009 में हुई थी, जब वे भिंड से कांग्रेस के लोकसभा उम्मीदवार भगीरथ प्रसाद के लिए चुनाव प्रचार कर लौट रहे थे। 
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