जहां तक कांग्रेस का सवाल है तो वह लगभग 20 सीटें जयस को देने के लिए राजी बताई जाती है पर कुक्षी के मामले में वह भी झुकने को तैयार नहीं है। उसकी एक बड़ी वजह यह है कि 1972 से लेकर अभी तक कांग्रेस कुक्षी में केवल दो चुनाव हारी है। एक 1990 का विधानसभा चुनाव और दूसरा 2012 का उपचुनाव। अब देखना यह होगा कि कांग्रेस समझौता करके अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारेगी।
गौरतलब है कि कांग्रेस ने बसपा, सपा और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के साथ भी समझौते की कोशिश की थी, लेकिन सीटों की संख्या को लेकर बात बन नहीं सकी। कमोबेश यही कहानी जयस के मामले में है। राज्य में 28 नवंबर को चुनाव है। लेकिन मुख्य प्रतिद्वंदी भाजपा और कांग्रेस अपने उम्मीदवारों के नाम तय नहीं कर पाए हैं।