छतरपुर जिले और समूचे बुंदेलखंड अंचल में लोगों को मृत्यु के बाद अस्थि संचय करने के बाद गंगा में विसर्जन और तर्पण के लिए तरसना पड़ रहा है। अब तक तो मृत्यु उपरांत चिता ठंडी होने पर 2 दिनों में अस्थि संचय कर लिया जाता था और घर में अस्थि दर्शन के बाद प्रयागराज ले जाकर उन अस्थियों को गंगा में तर्पण/सिरा दिया जाता था। अब इसमें भारी समस्या आ रही है। जिसके के मामले सामने आ रहे हैं।
मृतकों के परिजनों ने बताई परेशानी
लोगों ने अपनी पहचान और नाम छिपाते हुए बताया कि इस समय प्रयागराज में कुंभ स्नान करने वालों की भारी भीड़ है, जिसके चलते वहां जाना बहुत मुश्किल हो गया है। अगर किसी तरह पहुंच भी जाते हैं तो भारी परेशानियों का सामना कारण पड़ता है और समय भी बहुत लगता है, जिसके चलते लोगों ने फूल/अस्थि विसर्जन को पोस्टपोंड कर दिया है।
रिजर्वेशन के बावजूद नहीं मिल रही जगह
कुंभ में सरकार ने भले ही अतिरिक्त ट्रेनों की व्यवस्था की है, पर वह नाकाफी नजर आ रही है। भारी भीड़ के चलते रिजर्वेशन के बावजूद लोगों को ट्रेन में जगह नहीं मिल रही। इसके बाद स्टेशन पर पहुंचने पर गेट भी नहीं खुलते, और तो और ट्रेन के अंदर बैठे लोग गेट नहीं खोलते, ऐसे में ट्रेन 1 से 2 मिनट रुककर अपना समय होते ही निकल जाती है।
अस्थियां लेकर खड़े रहे स्टेशन पर चली गई ट्रेन
ताजा मामला निकलकर आया है कि छतरपुर जिला मुख्यालय के रेलवे स्टेशन से जहां पूर्व से रिजर्वेशन पर अस्थियों को गले में टांगे अस्थि संचय को प्रयागराज जाने को जब लोग पहुंचे तो उन्हें ट्रेन में जगह नहीं मिली, और वह ट्रेन में नहीं चढ़ सके, जिससे उन्हें अस्थियां लेकर घर वापस लौटना पड़ा। लोगों की मानें तो ऐसा उनकी जिंदगी में पहली बार हुआ है कि उन्हें अस्थियां लेकर घर वापस आना पड़ा। इससे पहले ऐसा कभी नहीं हुआ, पर इस बार हो रहा है।
गौशाला में या पेड़ों पर टांग रहे अस्थियां
वहीं इस मामले में जब लोगों से बात की तो उनका कहना है कि ऐसी स्थिति में अस्थियों का संचय कर उन्हें पोटली में भरकर गौशाला में रख रहे हैं या फिर पेड़ों पर टांग दे रहे हैं। जब प्रयागराज के पंडा ग्रीन सिग्नल देंगें और आने को कहेंगे तो अस्थियों को विसर्जन के लिए ले जाया जायेगा।
रेल प्रशासन की व्यवस्थाओं की खुली पोल
वहीं लोगों का आरोप है कि कुंभ मेले के कारण अत्यधिक भीड़ ने रेल विभाग की व्यवस्थाओं की पोल खोलकर रख दी है। एक तो ट्रेन के गेट नहीं खुलते और ट्रेन के दरवाजे बंद कर दिये जाते हैं। अगर कहीं गेट खुलते भी हैं तो उसमें चढ़ने के लिए पैर रखने तक की जगह नहीं रहती, जिससे लोग खासे परेशान हैं।