फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Chhatarpur News: गिद्धों का सुरक्षित ठिकाना बने बकस्वाहा के जंगल, जिले के 735 गिद्धों में से 309 का निवास यहीं

Sun, 23 Feb 2025 08:49 PM IST
छतरपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छतरपुर

सार

बकस्वाहा के घने जंगल गिद्धों के लिए सुरक्षित आश्रय बन रहे हैं। छतरपुर जिले में 2025 में 735 गिद्धों की गणना हुई, जिनमें से 309 बकस्वाहा में पाए गए। गिद्धों की संख्या में लगातार वृद्धि पर्यावरण के लिए शुभ संकेत है, जिससे स्वच्छता और पारिस्थितिकी संतुलन बना रहता है।
विज्ञापन
जिले के 735 गिद्धों में से 309 का निवास बकस्वाहा..
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

मध्य प्रदेश वन विभाग और प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) मप्र भोपाल के निर्देशन में 2024-25 के गिद्ध गणना अभियान के तहत छतरपुर जिले में तीन दिनों तक गिद्धों की गणना की गई। जिले के छह वन परिक्षेत्रों में कुल 735 गिद्धों की पहचान हुई, जो पिछले वर्ष की तुलना में 26 अधिक हैं। विशेष रूप से बकस्वाहा वन क्षेत्र में सबसे अधिक 309 गिद्ध और 109 घोंसले पाए गए, जिससे स्पष्ट होता है कि यह क्षेत्र गिद्धों के लिए सुरक्षित ठिकाना बनता जा रहा है।
विज्ञापन


प्रजातियों की विविधता और संरक्षण के प्रयास
गणना के दौरान भारतीय गिद्ध, राज गिद्ध और इजिप्शियन गिद्ध जैसी विभिन्न प्रजातियाँ पाई गईं। बकस्वाहा में सबसे अधिक प्रजातियों की उपस्थिति दर्ज की गई। वनमंडलाधिकारी सर्वेश सोनवानी ने बताया कि गिद्ध मृत प्राणियों को खाकर पर्यावरण को स्वच्छ रखते हैं और संक्रामक रोगों को फैलने से रोकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, बकस्वाहा का घना जंगल, उपयुक्त जलवायु और पर्याप्त भोजन गिद्धों के लिए आदर्श आवास है। इस बार निवार और चंदनपुरा जैसे नए इलाकों में भी गिद्धों की उपस्थिति दर्ज की गई, जिन्हें सुरक्षित रखने के लिए विशेष उपाय किए जाएंगे।

संख्या में निरंतर वृद्धि, पर्यावरण के लिए शुभ संकेत
पिछले वर्षों की तुलना में गिद्धों की संख्या में निरंतर वृद्धि देखी गई है। 2019 में छतरपुर जिले में 514 गिद्ध थे, जिनमें से 209 बकस्वाहा में थे। 2024 में यह संख्या 709 हो गई, जिसमें से 299 गिद्ध बकस्वाहा में दर्ज किए गए। 2025 में जिले में कुल 735 गिद्धों की गणना हुई, जिनमें से 309 बकस्वाहा में पाए गए।
विज्ञापन


पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सकारात्मक संकेत
गिद्धों को पर्यावरण का स्वच्छता प्रहरी माना जाता है, और उनकी संख्या में वृद्धि पर्यावरण के स्वास्थ्य और पारिस्थितिकी संतुलन का संकेत है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी सोशल मीडिया पर गिद्धों की बढ़ती संख्या पर खुशी जताई और इसे राज्य के संरक्षण प्रयासों की सफलता बताया। बकस्वाहा के घने जंगल और सुरक्षित वातावरण ने गिद्धों के लिए एक आदर्श आवास स्थल प्रदान किया है, जो पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें