अब लिव-इन में नहीं, पति-पत्नी बनकर रहेंगे...
दीपेंद्र और शर्मिला दोनों शादी के बाद की रस्म अदायगी और परिवार के साथ वक्त गुजारने के बाद वापस कंपनी में जॉब करने निकल जाएंगे। जहां पहले वह लिव-इन में रह रहे थे, अब पति-पत्नी की तरह रहेंगे और फैमिली प्लानिंग के बारे में सोचेंगे। दरअसल, अब तक वह इसके लिए प्रॉपर तैयार नहीं थे।
10 साल पहले खेत जाते समय हुई मुलाकात और दोस्ती फिर प्यार अब शादी...
लवकुशनगर के लोकेश चौरसिया का लवकुशनगर के गुढ़ा गांव की रीना कुशवाहा से पिछले 10 साल से अफेयर था। लोकेश और रीना बताते हैं कि दोनों की मुलाकात अपने-अपने खेत जाते समय हुई थी। दरअसल, लोकेश का खेत रीना के गांव गुढ़ा के पास है, जहां 10 साल पहले जब लोकेश खेत जा रहा था, उसी दौरान रीना भी अपने खेत जा रही थी। रास्ते में मुलाकात हुई और यह मुलाकात पहले दोस्ती में बदली, फिर प्यार में बदल गई। जहां अब उनकी शादी हो गई है।
10 साल से अफेयर, नहीं की कोर्ट मैरिज...
10 साल से चल रहे प्यार के बाद कोरोना कॉल खत्म होने पर उन्होंने अपने परिवार को बताया, जिसे जानकर वे हैरान रह गए और अन्तरजातीय विवाह को तैयार नहीं हुए। उनके रिश्ते को मानने से मना कर दिया, जिसके लिए उन्होंने परिवार वालों से कहा कि अगर हम चाहते तो अब तक घर से भागकर या चुपचाप कोर्ट मैरिज कर लेते। लेकिन हम आप लोगों (दोनों परिवार) की सहमति के बिना ब्याह करना नहीं चाहते थे। इसलिए अब तक ऐसा नहीं किया, अब जब आप लोगों (दोनों परिवारों) की सहमति होगी, तब ही शादी करेंगे। वरना दोनों कहीं और शादी नहीं करेंगे, ऐसे ही रहेंगे।
दो साल लग गए मनाने में...
लोकेश-रीना बताते हैं कि उन्हें अपने परिवारों को मनाने में दो साल लग गए, तब कहीं जाकर माने। अब दोनों परिवारों की सहमति से समाज के बैनर/मंडप में ब्याह किए, जो दोनों परिवारों की सहमति से सम्पन्न हुआ है।
दोनों परिवार की सहमति से हुआ अन्तरजातीय विवाह...
महाराजपुर के मोहित चौरसिया और दिल्ली उत्तर-पश्चिम की गौरी हलधर की मुलाकात तीन साल पहले नोएडा की एक कंपनी में जॉब करने के दौरान हुई। जहां दोनों ने पहले एक-दूसरे को जाना, फिर दोस्ती और प्यार हुआ। अपने बारे में दोनों ने अपने परिजनों/परिवार को बताया तो आपसी सहमति के बाद दोनों के परिजन और परिवार तैयार हो गए। जहां अब दोनों ने चौरसिया समाज के सामूहिक विवाह सम्मेलन में शादी की। इस दौरान दोनों के परिवार शामिल रहे। वहीं अब गौरी का कहना है कि वह अपना सरनेम बदलेगी और आगे से गौरी चौरसिया लिखेगी।
पान की दुकान पर मुलाकात शादी में बदली...
बांदा बबेरू के नरेंद्र चौरसिया और चित्रकूट भरतपुर की वंदना भांवरे की मुलाकात भी कुछ यूं ही बाजार में हुई। नरेंद्र पान बेचने की दुकानदारी करता है। जहां वंदना नरेंद्र की दुकान पर पान खरीदने आई और यह मुलाकात उन्हें शादी के इस पड़ाव तक ले आई, जहां अब दोनों परिवारों की सहमति से सम्मलेन में शादी की गई।
मामला चाहे जो भी हो, पर इतना तो तय है कि महाराजपुर में हुए चौरसिया समाज के सामूहिक विवाह सम्मेलन में एक नई इबारत लिखी गई है, जिसने इन शादियों को एक नया आयाम दिया है, जिसके साथ ही एक मैसेज भी प्ले हुआ है कि अगर हमें प्यार हुआ है और वह भी अन्तरजातीय है तो परिवार के साथ मिल बैठकर बात करें। आपसी सहमति से रिश्ता आगे बढ़ाएं और कोई गलत कदम न उठाकर अपने और अपनों को ठेश न पहुंचाएं। आपसी पारिवारिक सहमति से रिश्ते कायम करते हुए उन्हें परस्पर सम्मान और ऊंचाईयां दें।