ड्रेसिंग रूम के बाहर खड़े मरीज।
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कलेक्टर के औचक निराक्षण और चिकित्सकों को फटकार लगाने के बाद भी छतरपुर जिला अस्पताल के हाल प्रदेश की बदलाह स्वास्थ्य सेवाओं की कहानी कह रहे हैं। यहां हालात सुधरने की जगह बद से बदतर होते जा रहे हैं। अस्पताल में लापरवाही का आलम ये है कि करोड़ों की लागत से बनी जिला अस्पताल की नई 5 मंजिला इमारत में घायल मरीजों की मरहम पट्टी तक नहीं हो पा रही है।
जानकारी के अनुसार अस्पताल के ड्रेसिंग रूम में बीते 3 दिनों से टॉयलेट का गंदा पानी भर रहा है, जिसके चलते पूरे फ्लोर में गंदगी पसरी है और दुर्गंध आ रही है। मरीज बदबू से बेहाल हैं लेकिन मजबूरी में उन्हें उसी गंदगी में ड्रेसिंग के लिए लाइन में खड़े होना पड़ रहा है।
जिला अस्पताल में ड्रेसिंग कराने आई भर्ती मरीज पूनम रैकवार और चंद्रभान यादव ने बताया कि ड्रेसिंग नहीं होने से उनके घाव ठीक नहीं हो पा रहे हैं। वहीं मामले में सर्जिकल और ट्रॉमा वॉर्ड के ड्रेसर मंगल सिंह तोमर से बात की तो उसने कहा कि वे वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत करा चुके हैं बावजूद हालात नहीं सुधरे। मौके पर मौजूद जिला अस्पताल के RMO डॉ. गुप्ता से बात की तो उन्होंने तत्काल फोन लगाते हुए सफाई ठेकेदार को व्यवस्था सुधारने की बात कही।
ड्रेसिंग रूम के अंदर मरीजों का घुसना तो दूर खड़ा होना भी मुश्किल है। अस्पताल प्रबंधन कलेक्टर के निरीक्षण से पूर्व व्यवस्थाएं चाक-चौबंध कर लेता है और उनके जाते ही चारों और असुविधाओं का अंबार लग जाता है।