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'ताई' और 'भाई' की लड़ाई में फंस गया इंदौर की 9 सीटों पर उम्मीदवारों का एलान?

Mon, 05 Nov 2018 04:18 PM IST
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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पार्टी से नाराज सुमित्रा महाजन? - फोटो : Amar Ujala
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मध्यप्रेदश के लिए भाजपा की एक और सूची, इंदौर की 9 विधानसभा सीटों के लिए एक और इंतजार लेकिन इस बार भी अधूरा का अधूरा। दूसरी सूची में 17 नाम तो आए लेकिन ताई और भाई की सियासी तनातनी का नतीजा ये हुआ कि इंदौर की 25 लाख से ज्यादा आबादी अब भी नुमाइंदगी के इंतजार में है। 
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ताई यानी इंदौर से सांसद सुमित्रा महाजन और भाई यानी भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय। दोनों पुत्रमोह में हैं। खबर है कि इंदौर-2 विधानसभा क्षेत्र से कैलाश विजयवर्गीय जहां अपने बेटे आकाश को लड़वाना चाहते हैं तो सुमित्रा महाजन अपने बेटे मंदार के लिए इंदौर-3 से टिकट की उम्मीद में हैं। 

सीधे तौर पर देखने में ये तो दो अलग सीटें ही हैं। लेकिन यहीं मामला दिलचस्प हो जाता है। दरअसल, अगर कैलाश विजयवर्गीय के बेटे आकाश को इंदौर-2 से लड़वाने पर आलाकमान सहमत हो जाता है तो मौजूदा विधायक रमेश मेंदोला को हटना पड़ेगा। अब विजयवर्गीय मेंदोला को इंदौर-3 से लड़ाना चाहते हैं। लेकिन इंदौर-3 से सुमित्रा महाजन अपने बेटे मंदार को खड़ा करने की इच्छा रखती हैं। झगड़ा सिर्फ इतना भर नहीं है। चर्चा तो ये भी कि इंदौर-4, इंदौर-5 और सांवेर विधानसभा सीट को लेकर भी ताई और भाई के बीच मामला गरम है। 
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वैसे जब पत्रकारों ने सुमित्रा महाजन से टिकट बंटवारे को लेकर सवाल किया तो उनका कहना था कि इस बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं। 

सियासी गलियारों में सुमित्रा महाजन और कैलाश विजयवर्गीय के बीच यूं भी संबंध कोई बहुत अच्छे नहीं बताए जाते। ऐसे में ये लड़ाई भाजपा के सियासी भविष्य पर सवाल बनकर न मंडराने लगे, इसके लिए नरेंद्र सिंह तोमर को विशेष विमान से इंदौर की उड़ान भरनी पड़ी। 

नरेंद्र सिंह तोमर और विनय सहस्त्रबुद्धे दोनों महाजन के घर चर्चा के लिए पहुंचे। लगभग 45 मिनट की चर्चा के बाद नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि टिकटों को लेकर जो चर्चा की जानी थी वह पूरी हो चुकी है। जल्द सभी के नाम घोषित किए जाएंगे साथ ही उन्होंने कहा कि ताई हमारी आदरणीय है और टिकट को लेकर किसी प्रकार की चर्चा उनसे नहीं हो पाई थी क्योंकि वह विदेश यात्रा पर थी। अब उनके लौटने के बाद उन से चर्चा की गई है। हालांकि, सुमित्र महाजन इस पूरी प्रणाली से नाखुश नजर आ रही हैं। दोनों जल्द से जल्द किसी नतीजे तक पहुंचने की कोशिश करेंगे ताकि कार्यकर्ताओं और विपक्ष के बीच मजबूती का संदेश भेजा जा सके। 
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कहा जा रहा है कि चेहरों और सियासी रसूख की इस लड़ाई में अगर बात नहीं बनती है तो भाजपा अध्यक्ष अमित शाह भी दखल दे सकते हैं। 
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