24 वर्ष के लंबे अंतराल के बाद रीवा में कांग्रेस को महापौर पद तो मिला, पर सदन पर कब्जा भाजपा का ही रहेगा। छह निर्दलीय पार्षदों ने भाजपा की सदस्यता लेकर इस पर मुहर लगा दी है। साथ ही दावा मजबूत किया है।
मध्य प्रदेश के नगर निगम चुनावों में कांग्रेस ने रीवा में 24 साल बाद महापौर पद हासिल किया था। लग रहा था कि जोड़-तोड़ कर सदन पर भी वह कब्जा कर लेगी। हालांकि, सात निर्दलीय पार्षदों को सदस्यता देकर भाजपा ने कांग्रेस से यह मौका छीन लिया है। 45 पार्षदों के सदन में 24 पार्षदों के साथ भाजपा का कब्जा होगा। इससे परिषद अध्यक्ष की कुर्सी पर भाजपा ने दावा मजबूत कर लिया है।
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अजय मिश्रा बाबा ने 24 साल बाद रीवा में महापौर पद कांग्रेस की झोली में डाला। उनकी तैयारी परिषद पर कब्जे की थी। भाजपा ने तेजी से सक्रियता दिखाई और सात निर्दलीय पार्षदों को अपने साथ कर लिया। दरअसल, 45 वार्डों वाले रीवा नगर निगम में बहुमत का आंकड़ा 23 पार्षदों का है। भाजपा के 18 पार्षद जीतकर आए, जबकि कांग्रेस के 16 सदस्य। 11 निर्दलीय पार्षद सदन में पहुंचे, जिनमें से सात भाजपा में शामिल हो गए। इससे भाजपा के पास अब 24 पार्षद हो गए है।
शामिल होने वाले ज्यादातर पार्षद भाजपा के बागी
कहा जा रहा है जिन सात पार्षदों ने भाजपा की सदस्यता ली है, वे भाजपा के ही बागी बनकर चुनाव मैदान में उतरे थे। रीवा विधायक राजेंद्र शुक्ला ने इन छह पार्षदों को भाजपा की सदस्यता दिलाई। इनमें वार्ड नंबर 1 से पार्षद शिवराज रावत, वार्ड नंबर 5 से पार्षद संजय सिंह, वार्ड नंबर 22 से पार्षद पूजा प्रमोद सिंह, वार्ड नंबर 40 से पार्षद नीलू कटारिया, वार्ड नंबर 43 से पार्षद शांति उर्फ आशा शामिल हैं।
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रीवा नगर निगम के 7वें निर्दलीय पार्षद ने भाजपा की ज्वाइन
रीवा नगर निगम वार्ड नं. 21 से नवनिर्वाचित पार्षद संजय खान ने खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड अध्यक्ष जितेंद्र लिटोरिया और राजेंद्र शुक्ला की उपस्थिति में भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। इस अवसर पर कई नवनिर्वाचित पार्षदगण उपस्थित रहे ।