भाजपा प्रदेशाध्यक्ष वीडी शर्मा।
- फोटो : अमर उजाला
सुप्रीम कोर्ट के बिना आरक्षण के चुनाव कराने के फैसले के बाद मध्य प्रदेश में बीजेपी और कांग्रेस के नेता आमने-सामने आ गए हैं। कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव ने कहा कि सरकार 56% आबादी के साथ षडयंत्र कर रही है। वहीं, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने ओबीसी वर्ग को आरक्षण से वंचित कर पाप करने का आरोप कांग्रेस पर लगाया।
पूर्व कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर कहा हमें इसी बात की आशंका थी। अन्य पिछड़ा वर्ग को लेकर सरकार की घोर लापरवाही के कारण आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का वह एजेंडा लागू हो गया है, जिसमें "आरक्षण समाप्ति" की बात की गई थी। शिवराज सरकार की वजह से प्रदेश की 56 प्रतिशत आबादी को भाजपा सरकार के षडयंत्र के कारण अपने वाजिब अधिकारों से वंचित होना पड़ेगा। पिछड़ा वर्ग से ही संबध मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान यह सौदा और षडयंत्र भविष्य में आपके लिए घातक होगा।
वहीं, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने कहा कि हमारी सरकार ने ओबीसी आरक्षण के साथ पंचायत चुनाव कराने के लिए ईमानदारी से प्रयास किए। कोर्ट ने जो अंतरिम फैसला सुनाया है, हम विधि विशेषज्ञों के साथ उसका अध्ययन कराएंगे और आगे के कदम उठाएंगे। हम चाहते हैं कि पंचायत चुनाव ओबीसी आरक्षण के साथ संपन्न हो, इसलिए ओबीसी आरक्षण के लिए मोडिफिकेशन में जाएंगे। शर्मा ने कांग्रेस नेताओं से सवाल किया कि जब कांग्रेस सरकार में थी और पंचायत चुनाव कराने की जिम्मेदारी उनकी थी, तब 27 प्रतिशत आरक्षण के लिए कांग्रेस सरकार ने ट्रिपल टेस्ट कराने के प्रयास क्यों नहीं किए? कांग्रेस ने यह सब न करते हुए योजनाबद्ध तरीके से चुनाव में व्यवधान डालने का काम किया। कांग्रेस के नेता इस चुनाव को सुप्रीम कोर्ट तक ले गए, जिसके कारण आज यह स्थिति बनी है। आज कोर्ट के अंतरिम आदेश से कांग्रेस के उन नेताओं के कलेजे को ठंडक तो मिली होगी, लेकिन भारतीय जनता पार्टी उनके षडयंत्र को फलीभूत नहीं होने देगी।
शर्मा ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ को जवाब देना चाहिए कि 8 मार्च 2019 को 14 से 27 प्रतिशत आरक्षण लागू करने के तत्कालीन सरकार के फैसले पर जब 10 मार्च को याचिका लगी तब 10 से 19 मार्च तक उनकी सरकार ने कोर्ट में अपना एडवोकेट जनरल तक खड़ा क्यों नहीं किया? उच्च न्यायालय द्वारा आरक्षण पर रोक लगाने के खिलाफ कांग्रेस की सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील तक नहीं की। इस धोखे के लिए कांग्रेस और कमलनाथ को प्रदेश में ओबीसी वर्ग से माफी मांगना चाहिए।