राजधानी में थाना प्रभारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग को लेकर जयस का प्रदर्शन गुरुवार को उग्र हो गया। अंबेडकर मैदान में जुटे कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री निवास की ओर बढ़ने की कोशिश की, लेकिन प्रकाश तरुण पुष्कर के सामने पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोक दिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिसकर्मियों के बीच विवाद बढ़ गया। मौके पर मौजूद जयस की एक महिला कार्यकर्ता पर कांस्टेबल को थप्पड़ मारने का आरोप है। प्रदर्शन के दौरान महिला पुलिस अधिकारियों और अन्य जवानों के साथ भी झूमाझटकी हुई। जयस कार्यकर्ता मिसरोद थाना प्रभारी रतन सिंह परिहार के खिलाफ एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम (एट्रोसिटी एक्ट) के तहत एफआईआर दर्ज करने की मांग कर रहे थे। उनका कहना है कि आदिवासी छात्रों के साथ कथित अभद्रता और गाली-गलौज के मामले में केवल निलंबन पर्याप्त नहीं है। संगठन की मांग है कि संबंधित अधिकारी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।
निलंबन काफी नहीं, एफआईआर दर्ज हो
प्रदर्शन के दौरान जयस कार्यकर्ताओं ने कहा कि 13 अक्टूबर को आदिवासी छात्रों के साथ हुए घटनाक्रम में कथित तौर पर अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया था। संगठन का आरोप है कि जय जोहार बोलने को लेकर छात्रों के साथ अभद्रता की गई। इसी मामले में पुलिस अधिकारी के खिलाफ एट्रोसिटी एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज करने की मांग की जा रही है। एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि निलंबन स्थायी कार्रवाई नहीं है। अधिकारी कुछ समय बाद बहाल हो सकते हैं, इसलिए एफआईआर दर्ज कर कानूनी प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए। कार्यकर्ताओं ने सरकार से सवाल किया कि जब गृह विभाग मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पास है, तो मामले में अब तक निलंबन से आगे कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
बैरिकेडिंग पर टकराव, पुलिस ने संभाली स्थिति
मुख्यमंत्री निवास की ओर जाने की कोशिश कर रहे कार्यकर्ताओं को पुलिस ने रास्ते में रोक दिया। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच बहस और धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। इसी दौरान एक महिला कार्यकर्ता पर पुलिस कांस्टेबल को थप्पड़ मारने का आरोप लगा। प्रदर्शन स्थल पर काफी देर तक तनाव बना रहा और पुलिसकर्मियों ने कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ने से रोकने का प्रयास किया।
एसीपी बोले- जांच के निष्कर्ष के आधार पर होगी कार्रवाई
प्रदर्शन के संबंध में एसीपी शैलेन्द्र सिंह चौहान ने कहा कि आदिवासी छात्रों के प्रदर्शन के दौरान एक पुलिस अधिकारी की ओर से अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किए जाने का मामला सामने आया था। शिकायत संज्ञान में आने के बाद संबंधित अधिकारी को निलंबित कर प्राथमिक जांच के आदेश दिए गए थे। उन्होंने बताया कि इस मामले में अलग-अलग संगठनों के प्रतिनिधियों ने पुलिस अधिकारियों से मुलाकात की थी। उन्हें आश्वासन दिया गया था कि जांच के बाद तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। एसीपी के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान हुई झड़प से जुड़े तथ्यों को भी संज्ञान में लिया जाएगा। फिलहाल प्राथमिकता प्रदर्शन समाप्त कराने और व्यवस्था बनाए रखने की है।
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जय जोहार पर टिप्पणी से शुरू हुआ विवाद
पूरा विवाद 13 अक्टूबर को सामने आया था। आरोप है कि भोपाल के मिसरोद थाना प्रभारी रतन सिंह परिहार ने आदिवासी छात्रों के प्रदर्शन के दौरान ‘जय जोहार’ बोलने पर अभद्र टिप्पणी और गाली-गलौज की थी। घटना का वीडियो सामने आने के बाद आदिवासी संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने कार्रवाई की मांग उठाई थी। मामले के तूल पकड़ने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों से चर्चा की थी। इसके बाद 14 अक्टूबर को टीआई रतन सिंह परिहार को निलंबित कर दिया गया और उनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए गए थे। हालांकि, जयस की मांग है कि विभागीय कार्रवाई के साथ एफआईआर भी दर्ज की जाए।