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यूनिवर्सिटी सीहोर में, नाम में भोपाल: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने सरकार से मांगा जवाब, 29 नवंबर तक डेडलाइन

Fri, 23 Oct 2026 05:16 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल

सार

वीआईटी भोपाल के नाम और सीहोर जिले में स्थित परिसर की लोकेशन को लेकर एनएसयूआई की शिकायत पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने राज्य सरकार से अतिरिक्त रिपोर्ट मांगी है। वेबसाइट, विज्ञापनों और कथित अनधिकृत क्लिनिक सहित अन्य आरोपों पर जानकारी देने के लिए 29 नवंबर तक का समय दिया गया है।
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वीआईटी भोपाल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भोपाल नाम से पहचाने जाने वाले वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (वीआईटी) को लेकर उठे सवालों पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने राज्य सरकार से दोबारा जवाब मांगा है। विश्वविद्यालय का परिसर सीहोर जिले के कोठरी कलां में स्थित है। ऐसे में नाम और वास्तविक लोकेशन के बीच अंतर से विद्यार्थियों और अभिभावकों को भ्रम होने की आशंका पर आयोग ने रिपोर्ट में स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर अतिरिक्त रिपोर्ट और कार्रवाई प्रतिवेदन प्रस्तुत करना होगा। इसके लिए 29 नवंबर की तारीख तय की गई है। मामला राष्ट्रीय छात्र संघ (एनएसयूआई) के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार की शिकायत से जुड़ा है। उन्होंने विश्वविद्यालय के नाम में भोपाल शब्द के इस्तेमाल पर सवाल उठाए थे। शिकायत में कहा गया कि नाम के कारण विद्यार्थी और अभिभावक परिसर की वास्तविक स्थिति को लेकर गलत धारणा बना सकते हैं। अब आयोग ने राज्य सरकार से इस आशंका पर स्पष्ट जवाब मांगा है।
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कानून से मिला नाम, लेकिन विद्यार्थियों के भ्रम पर जवाब अधूरा
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने 22 अक्टूबर को मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की रिपोर्ट और संबंधित दस्तावेजों पर विचार किया। आयोग ने माना कि वीआईटी भोपाल का नाम मध्य प्रदेश निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) अधिनियम, 2007 के तहत निर्धारित किया गया है। हालांकि, आयोग के सामने सवाल केवल नाम की वैधानिकता का नहीं है। असल मुद्दा यह है कि विश्वविद्यालय के नाम में भोपाल होने के बावजूद उसका परिसर सीहोर जिले में स्थित है, तो क्या इससे दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को स्थान के बारे में भ्रम हो सकता है? आयोग के मुताबिक, राज्य सरकार की ओर से पेश रिपोर्ट में इस पहलू पर स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई।

वेबसाइट और विज्ञापनों में क्या बताया जाता है?
आयोग ने विश्वविद्यालय की प्रचार सामग्री को लेकर भी सवाल उठाए हैं। विश्वविद्यालय के प्रॉस्पेक्टस, आधिकारिक वेबसाइट और विज्ञापनों में परिसर की वास्तविक लोकेशन किस तरह बताई जाती है, इसकी जानकारी मांगी गई है।इस मामले में विश्वविद्यालय के नाम को कानून के तहत तय होना बताना पर्याप्त नहीं माना गया है। आयोग यह जानना चाहता है कि दाखिले से पहले विद्यार्थियों को परिसर के वास्तविक स्थान की स्पष्ट जानकारी मिलती है या नहीं। राज्य सरकार को अब इस संबंध में तथ्यात्मक जानकारी देनी होगी।
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क्लिनिक और अशांति के आरोपों पर भी मांगी जानकारी
शिकायत में विश्वविद्यालय परिसर में कथित अनधिकृत क्लिनिक के संचालन और पूर्व में अशांति की घटनाओं से जुड़े आरोप भी शामिल हैं। आयोग ने गौर किया कि राज्य सरकार की रिपोर्ट में इन आरोपों की जांच के संबंध में जानकारी नहीं दी गई है। अब अतिरिक्त रिपोर्ट में इन पहलुओं पर की गई कार्रवाई और जांच की स्थिति भी स्पष्ट करनी होगी। हालांकि, आयोग की इस कार्रवाई को विश्वविद्यालय के खिलाफ आरोपों की पुष्टि या किसी अंतिम दोष निर्धारण के रूप में नहीं देखा जा सकता।मामले में अगला महत्वपूर्ण पड़ाव 29 नवंबर है। राज्य सरकार की नई रिपोर्ट से स्पष्ट होगा कि विश्वविद्यालय के नाम, वास्तविक लोकेशन और विद्यार्थियों को दी जाने वाली जानकारी के संबंध में क्या तथ्य सामने आते हैं और शिकायत के अन्य बिंदुओं पर क्या कार्रवाई की गई है।
 
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