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दिग्विजय पर कार्रवाई क्यों नहीं: सिर्फ मुझे नोटिस क्यों? निधि ने कांग्रेस संगठन को घेरा, 7 दिन का अल्टीमेटम

Wed, 15 Jul 2026 01:30 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल

सार

मध्य प्रदेश कांग्रेस की अंदरूनी लड़ाई अब खुलकर सामने आ गई है। दिग्विजय सिंह पर पुत्र मोह में संगठन को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाने वाली प्रदेश महासचिव निधि सत्यव्रत चतुर्वेदी ने खुद को मिले कारण बताओ नोटिस पर सवाल उठाए हैं। निधि ने पूछा है कि दिग्विजय सिंह के बयान पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई और सिर्फ उन्हें ही नोटिस क्यों दिया गया। साथ ही संगठन प्रभारी से सात दिन में जवाब मांगते हुए कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
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निधि सत्यव्रत चतुर्वेदी और दिग्विजय सिंह - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मध्य प्रदेश कांग्रेस में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को लेकर मचा घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब प्रदेश महासचिव निधि सत्यव्रत चतुर्वेदी ने पार्टी की अनुशासनात्मक कार्रवाई पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। निधि ने सीधे पूछा है दिग्विजय सिंह पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई और सिर्फ मुझे ही कारण बताओ नोटिस क्यों दिया गया? निधि का कहना है कि संगठन प्रभारी संजय कामले ने उन्हें 3 जुलाई को कारण बताओ नोटिस भेजा था, जिसका जवाब वह 9 जुलाई को दे चुकी हैं। अब जवाब सार्वजनिक करते हुए उन्होंने पार्टी की कार्रवाई को चयनात्मक और दुर्भावनापूर्ण करार दिया है।
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दिग्विजय के बयान से पार्टी को नुकसान हुआ तो कार्रवाई कहां?
निधि ने अपने जवाब में पूरे घटनाक्रम को लेकर संगठन को कठघरे में खड़ा किया है। उनका सवाल है कि उज्जैन जमीन विवाद पर कांग्रेस सरकार के खिलाफ अभियान चला रही थी। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए, लेकिन इसी बीच दिग्विजय सिंह ने सार्वजनिक रूप से अलग स्थिति रखते हुए संबंधित ट्रस्ट को सरकारी बताया। निधि का आरोप है कि दिग्विजय सिंह के बयान से कांग्रेस के अभियान और प्रदेश नेतृत्व की स्थिति कमजोर हुई। ऐसे में उन्होंने सवाल किया है कि यदि पार्टी अनुशासन सभी के लिए बराबर है तो दिग्विजय सिंह से स्पष्टीकरण क्यों नहीं मांगा गया? उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई?

पुत्र मोह में संगठन को नुकसान वाले बयान पर मिला नोटिस
दरअसल, दिग्विजय सिंह के बयान के बाद निधि चतुर्वेदी ने खुलकर मोर्चा खोल दिया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि दिग्विजय सिंह पुत्र मोह में संगठन को नुकसान पहुंचा रहे हैं। निधि ने पार्टी नेतृत्व से दिग्विजय सिंह के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग भी की थी। इसी बयान के बाद प्रदेश कांग्रेस ने निधि से स्पष्टीकरण मांगा। अब निधि का सवाल है कि जिस बयान के विरोध में उन्होंने आवाज उठाई, उस मूल बयान पर संगठन चुप क्यों है और सवाल उठाने वाले को ही नोटिस क्यों थमा दिया गया?
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आप मेरे वरिष्ठ नहीं, फिर नोटिस देने का अधिकार कैसे?
निधि ने संगठन प्रभारी संजय कामले के अधिकार क्षेत्र पर भी सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि वह मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी की महासचिव और प्रशिक्षण विभाग की सह-प्रभारी हैं। संजय कामले भी प्रदेश कार्यकारिणी में महासचिव हैं।
निधि ने पूछा है कि जब दोनों समकक्ष पदाधिकारी हैं तो एक महासचिव दूसरे महासचिव को सीधे कारण बताओ नोटिस किस अधिकार से जारी कर सकता है। उन्होंने कांग्रेस संविधान का हवाला देते हुए नोटिस को अधिकार क्षेत्र से बाहर और निष्प्रभावी बताया है।

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नोटिस पहले बाहर कैसे पहुंचा? मानहानि की चेतावनी
निधि ने आरोप लगाया है कि संगठन का आंतरिक नोटिस उन्हें आधिकारिक रूप से मिलने से पहले ही मीडिया और सामाजिक माध्यमों पर प्रसारित हो गया। इससे उनकी राजनीतिक और सामाजिक छवि को नुकसान पहुंचा। उन्होंने संगठन प्रभारी से सात दिन के भीतर लिखित स्पष्टीकरण मांगा है। निधि ने चेतावनी दी है कि जवाब नहीं मिलने या संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं आने पर वह मानहानि समेत कानूनी कार्रवाई का रास्ता अपना सकती हैं। उज्जैन जमीन विवाद से शुरू हुआ कांग्रेस का अंदरूनी घमासान अब दिग्विजय पर चुप्पी और निधि पर कार्रवाई क्यों? के सवाल पर आकर टिक गया है। निधि के जवाब के बाद अब नजर प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व पर है कि वह दिग्विजय सिंह और निधि चतुर्वेदी के मामले में क्या रुख अपनाता है।

 
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