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एम्स का रिसर्च: 30% से ज्यादा DNA डैमेज खतरनाक, धूम्रपान करने वालों पर सबसे ज्यादा खतरा,नई जांच से खुलेगा राज

Sun, 05 Apr 2026 05:31 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला भोपाल

सार

एम्स भोपाल की रिसर्च में सामने आया है कि पुरुषों में 30% से अधिक डीएनए फ्रैगमेंटेशन स्तर होने पर शुक्राणु की गुणवत्ता गंभीर रूप से प्रभावित होती है, जिससे बांझपन का खतरा बढ़ जाता है। यह समस्या खासतौर पर धूम्रपान करने वालों में ज्यादा पाई गई, जहां ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस डीएनए को नुकसान पहुंचाता है। 
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एम्स भोपाल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पुरुष बांझपन को लेकर एम्स भोपाल की ताज़ा रिसर्च ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। अध्ययन के मुताबिक, अगर शुक्राणु में डीएनए फ्रैगमेंटेशन 30% से ज्यादा हो जाए, तो यह फर्टिलिटी के लिए गंभीर खतरा बन जाता है। अमेरिका के सैन एंटोनियो में आयोजित यूएसकैप वार्षिक बैठक 2026 में प्रस्तुत इस शोध में बताया गया कि सामान्य वीर्य जांच से कई बार डीएनए डैमेज पकड़ में नहीं आता, जबकि यही छुपा हुआ नुकसान पुरुष बांझपन की बड़ी वजह बन सकता है।
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क्या कहती है रिसर्च?
- 30% से ज्यादा DNA फ्रैगमेंटेशन = खराब शुक्राणु गुणवत्ता
- धूम्रपान करने वालों में यह समस्या ज्यादा गंभीर
- ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बढ़ता है DNA डैमेज
- सामान्य जांच से छूट जाता है असली कारण

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नई जांच से खुलेगा असली राज
रिसर्च के अनुसार, डीएनए फ्रैगमेंटेशन इंडेक्स एक ऐसा आधुनिक टेस्ट है, जो शुक्राणु के छिपे हुए डीएनए नुकसान को पकड़ सकता है। इससे उन मामलों की पहचान आसान होगी, जो अब तक सामान्य टेस्ट में सामने नहीं आते थे। इस खोज से अब मरीजों को उनकी स्थिति के अनुसार पर्सनलाइज्ड ट्रीटमेंट मिल सकेगा। यानी हर केस के हिसाब से सटीक इलाज तय होगा, जिससे दंपतियों को सही समय पर सही इलाज मिलने की संभावना बढ़ेगी।
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टीम वर्क से मिली सफलता
इस रिसर्च में कई विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने योगदान दिया, जिससे यह बहु-विषयक अध्ययन और भी मजबूत बना। यह प्रोजेक्ट AIIMS भोपाल के आंतरिक फंड से पूरा किया गया। इस खोज से पुरुष बांझपन के मरीजों को उनकी स्थिति के अनुसार पर्सनलाइज्ड ट्रीटमेंट मिल सकेगा। साथ ही दंपतियों को सही समय पर सटीक सलाह और इलाज मिलने में मदद मिलेगी।
 
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