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शिक्षक भर्ती: भोपाल में 28 दिन से आंदोलन, सात दिन से निर्जला अनशन,अभ्यर्थियों ने खून से लिखा-इच्छामृत्यु चाहिए

Thu, 17 Sep 2026 05:53 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल

सार

भोपाल में वर्ग-2 और वर्ग-3 शिक्षक भर्ती में पद बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन 28वें दिन भी जारी है। ब्यावरा निवासी नरेंद्र राजपूत सात दिन से निर्जला अनशन पर हैं और अभ्यर्थियों के मुताबिक उनकी तबीयत बिगड़ रही है। आंदोलनकारियों ने खून से पत्र लिखकर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, राज्यपाल और राष्ट्रपति से इच्छामृत्यु की अनुमति मांगी है। 
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अभ्यर्थियों ने खून से लिखा पत्र - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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 मध्यप्रदेश में वर्ग-2 और वर्ग-3 शिक्षक भर्ती में पद बढ़ाने की मांग को लेकर अभ्यर्थियों का आंदोलन 28वें दिन भी जारी है। डीपीआई कार्यालय के सामने पिछले तीन दिन से प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों में राजगढ़ के ब्यावरा निवासी नरेंद्र राजपूत सात दिन से निर्जला अनशन पर हैं। आंदोलनकारियों के मुताबिक लगातार पानी नहीं पीने से उनकी तबीयत बिगड़ रही है और बुधवार रात वह कई बार बेहोश भी हुए। इसी बीच अभ्यर्थियों ने खून से पत्र लिखकर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, राज्यपाल और राष्ट्रपति से इच्छामृत्यु की अनुमति मांगी है।नरेंद्र राजपूत का कहना है कि सात दिनों से उन्होंने पानी तक नहीं पिया है। उन्हें सीने में दर्द और रक्तचाप बढ़ने की शिकायत है। उनका आरोप है कि हालत बिगड़ने के बावजूद गुरुवार सुबह तक डॉक्टर जांच के लिए नहीं पहुंचे। उन्होंने पुलिस अधिकारियों से चिकित्सक बुलाने की मांग भी की, लेकिन सुनवाई नहीं होने का दावा किया।
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बारिश में भी जारी रहा धरना
बुधवार रात डीपीआई कार्यालय के बाहर अचानक तेज बारिश हुई। प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों के साथ उनका सामान भी भीग गया, लेकिन आंदोलन जारी रहा। निर्जला अनशन कर रहे नरेंद्र राजपूत भी बारिश में बैठे रहे। प्रदर्शनकारियों ने डीपीई आयुक्त के कथित रवैये के खिलाफ नारेबाजी की।

खून से लिखा- इच्छामृत्यु की अनुमति दें
आंदोलनकारियों ने अपने खून से लिखे पत्र में प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, राज्यपाल और राष्ट्रपति से इच्छामृत्यु की अनुमति मांगी है। पत्र में शिक्षक भर्ती में पद बढ़ाने की मांग और लंबे समय से चल रहे आंदोलन का उल्लेख किया गया है। नरेंद्र राजपूत ने प्रधानमंत्री के जन्मदिन का जिक्र करते हुए कहा कि अभ्यर्थी उन्हें कोई उपहार देने की स्थिति में नहीं हैं और वे उपहार के तौर पर अपनी मौत मांग रहे हैं।
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आश्वासन के बाद खत्म किया था अनशन
राजपूत के मुताबिक इससे पहले भी उन्होंने भूख हड़ताल की थी, जिसे पद बढ़ाने का आश्वासन मिलने के बाद समाप्त किया गया था। उनका कहना है कि आश्वासन पूरा नहीं हुआ, इसलिए दोबारा अनशन शुरू करना पड़ा। उन्होंने कहा कि सात दिन से पानी नहीं पीना मजबूरी में उठाया गया कदम है। राजपूत ब्यावरा के रहने वाले हैं और बच्चों को पढ़ाते हैं। उनका कहना है कि शिक्षक बनना उनका लक्ष्य है।

वर्ग-2 में 10 हजार, वर्ग-3 में 25 हजार पद बढ़ाने की मांग
अभ्यर्थी वर्ग-2 माध्यमिक शिक्षक भर्ती में कम से कम 10 हजार पद बढ़ाकर दूसरी काउंसलिंग कराने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि प्रत्येक विषय में कम से कम 3 हजार पद बढ़ाए जाएं। वहीं वर्ग-3 प्राथमिक शिक्षक भर्ती में पदों की संख्या बढ़ाकर कम से कम 25 हजार करने और दूसरी काउंसलिंग शुरू करने की मांग है। अभ्यर्थियों ने अपने ज्ञापन में स्कूल शिक्षा और जनजातीय कार्य विभाग में शिक्षक पद रिक्त होने का दावा किया है। उन्होंने 2018 और 2022 की शिक्षक भर्ती में पद बढ़ाकर अतिरिक्त काउंसलिंग कराए जाने का भी हवाला दिया है।

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28 दिन से आंदोलन, पदवृद्धि पर अड़े अभ्यर्थी
अभ्यर्थियों का कहना है कि पद बढ़ाने की मांग को लेकर वे पिछले सात-आठ महीने से संघर्ष कर रहे हैं और भोपाल में आंदोलन अब 28वें दिन पहुंच गया है। उनका तर्क है कि सीमित पदों के कारण परीक्षा में सफल होने के बावजूद कई अभ्यर्थियों को नियुक्ति का अवसर नहीं मिल पा रहा है। फिलहाल डीपीआई कार्यालय के सामने प्रदर्शन जारी है। एक ओर नरेंद्र राजपूत सात दिन से निर्जला अनशन पर हैं और उनकी तबीयत बिगड़ने का दावा किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर आंदोलनकारियों ने खून से पत्र लिखकर इच्छामृत्यु की मांग की है।


 
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